Sidhi news:“अमिलिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में ‘सेवा’ के नाम पर वसूली! डिलीवरी के बदले 500 रुपये की मांग, गरीब मरीजों से खुलेआम घूस का आरोप”
अनिल शर्मा सीधी
Sidhi news:सीधी जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अमिलिया से एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और भ्रष्टाचार का गंभीर मामला सामने आया है। ग्राम हीरादेही निवासी लाल बहादुर साकेत ने आरोप लगाया है कि अमिलिया स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ नर्स विद्या तिवारी द्वारा मरीजों और उनके परिजनों से खुलेआम पैसे की मांग की जाती है। पीड़ित लाल बहादुर साकेत अपनी बेटी के इलाज और प्रसव के लिए अमिलिया प्राथमिक अस्पताल पहुंचे थे, जहां उनसे कथित रूप से ₹500 की अवैध वसूली की गई।
वही पीड़ित का कहना है कि वे अत्यंत गरीब परिवार से आते हैं। शासन की ओर से मिले कोटे का गेहूं बेचकर उन्होंने नर्स को ₹500 घूस के रूप में दिए, ताकि अस्पताल में डिलीवरी करवाई जा सके। इसके अलावा, नर्स द्वारा यह भी कहा गया कि अस्पताल में दवाइयां उपलब्ध नहीं हैं और सारी दवाइयां बाहर की मेडिकल दुकान से ही मंगवानी होंगी। पीड़ित के अनुसार, नर्स ने साफ शब्दों में धमकी दी कि यदि दवाइयां बाहर से नहीं लाई गईं और पैसे नहीं दिए गए तो मरीज को जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया जाएगा।
Sidhi news: यह कोई पहला मामला नहीं है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस तरह की शिकायतें पहले भी सीएमएचओ (मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी) से की जा चुकी हैं, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे यह सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या इस पूरे मामले में उच्च अधिकारियों की मौन सहमति है, या फिर शिकायतों को जानबूझकर दबाया जा रहा है।
वही एक ओर सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में संस्थागत प्रसव, मुफ्त इलाज और दवाइयों के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर अमिलिया जैसे स्वास्थ्य केंद्रों में गरीब मरीजों से वसूली कर उन्हें मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की इस लापरवाही और कथित भ्रष्टाचार से आम जनता का भरोसा सरकारी व्यवस्था से उठता जा रहा है।
जहा ग्रामीणों और पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, अमिलिया अस्पताल के प्रबंधन और संबंधित नर्स के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी गरीब मरीज को इलाज के नाम पर अपमान और लूट का शिकार न होना पड़े।
