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मानपुर वन परिक्षेत्र में शावक की मौत, जनवरी में चौथी घटना से बढ़ी चिंता

Tapas Gupta

By Tapas Gupta

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मानपुर वन परिक्षेत्र में शावक की मौत, जनवरी में चौथी घटना से बढ़ी चिंता

उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)

जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से जुड़े मानपुर वन परिक्षेत्र में एक बार फिर बाघ की मौत का मामला सामने आया है। मृत बाघ की उम्र लगभग 5 महीने बताई जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बाघ की मौत आपसी संघर्ष के कारण हुई है, हालांकि वन विभाग द्वारा मामले की जांच जारी है।

मानपुर रेंजर मुकेश अहिरवार ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि क्षेत्र में एक बाघ की मृत्यु हुई है और नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। लेकिन इस घटना के सामने आने के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों का कहना है कि बाघ की मौत की जानकारी स्थानीय अधिकारियों को सुबह ही मिल गई थी, इसके बावजूद वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी सूचना दोपहर में दी गई। सूचना देने में हुई यह देरी संदेह और लापरवाही की ओर इशारा कर रही है।

चिंताजनक तथ्य यह है कि जनवरी माह में अब तक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व क्षेत्र में चार बाघों की मौत हो चुकी है। इतने कम समय में लगातार बाघों की मौत ने देश के सबसे चर्चित टाइगर रिजर्व में संरक्षण व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस रिजर्व पर बाघ संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, वहां बाघों का सुरक्षित न रह पाना गंभीर विफलता मानी जा रही है।

वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि बांधवगढ़ में लगातार बाघों की मौत स्थानीय अधिकारियों की नाकामी का नतीजा है। उन्होंने मांग की है कि जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल निलंबित किया जाए। अजय दुबे के अनुसार बाघों की मौत का यह सिलसिला अब जबलपुर हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बाघों के बीच बढ़ता क्षेत्रीय संघर्ष, निगरानी की कमी और प्रबंधन में लापरवाही इस तरह की घटनाओं की बड़ी वजह हो सकती है। कैमरा ट्रैप, गश्त और मॉनिटरिंग सिस्टम होने के बावजूद अगर इतनी कम उम्र के बाघ की जान चली जाती है, तो यह व्यवस्था की कमजोरी को साफ दर्शाता है।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व इन दिनों लगातार बाघों की मौत के कारण सुर्खियों में है। यह स्थिति न केवल संरक्षण प्रयासों पर सवाल उठा रही है, बल्कि भविष्य में बाघों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा कर रही है। यदि समय रहते ठोस और जवाबदेह कदम नहीं उठाए गए, तो बाघ संरक्षण के दावे सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएंगे।

Tapas Gupta

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मै तपस गुप्ता 9 सालों से लगातार पत्रकारिता मे सक्रिय हूं, समय पर और सटीक जानकारी उपलब्ध कराना ही मेरी पहली प्राथमिकता है। मो-7999276090

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