बांधवगढ़ के जंगल में दो भालुओं की मौत से हलचल, गश्ती, डॉग स्क्वाड और जांच के बीच बढ़े सवाल
उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व एक बार फिर सुर्खियों में है। मानपुर बफर क्षेत्र के बीट खम्हा में वन अमले की नियमित गश्त के दौरान एक अवयस्क नर भालू का शव मिलने से हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही पूरा अमला सक्रिय हुआ और मौके पर डॉग स्क्वाड को बुलाया गया। जांच आगे बढ़ी तो कुछ किलोमीटर दूर कक्ष क्रमांक 276 में एक मादा भालू का शव भी मिला। इस तरह कम समय में दो भालुओं की मौत ने जंगल के भीतर की परिस्थितियों को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार मादा भालू की उम्र लगभग छह वर्ष और नर शावक की उम्र करीब डेढ़ वर्ष आंकी गई है। दोनों शवों के सभी अंग सुरक्षित पाए गए हैं, जिससे शिकार की आशंका कम जताई जा रही है। फिर भी हर पहलू को ध्यान में रखते हुए जांच का दायरा बढ़ाया गया है। घटनास्थल पर पंचनामा तैयार कर क्षेत्र को सुरक्षित किया गया और डॉग स्क्वाड ने आसपास के इलाके की गहन पड़ताल की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मेटल डिटेक्टर से भी जांच कराई गई, ताकि किसी अवैध गतिविधि के संकेत मिल सकें। वाइल्डलाइफ हेल्थ ऑफिसर की मौजूदगी में विस्तृत पोस्टमार्टम कराया गया है और जरूरी नमूने अधिकृत प्रयोगशाला भेजे जा रहे हैं। प्रारंभिक तौर पर दोनों भालुओं की मौत का कारण किसी अन्य वन्यप्राणी से संघर्ष माना जा रहा है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।
इस घटना ने इसलिए भी ध्यान खींचा है क्योंकि नए साल की शुरुआत में ही रिजर्व में चार बाघों की मौत का मामला चर्चा में रहा था। उस घटना के बाद सुरक्षा और निगरानी को लेकर बड़े दावे किए गए थे। अब भालुओं की मौत ने फिर से वन्यजीव संरक्षण की जमीनी हकीकत पर बहस तेज कर दी है।
स्थानीय लोगों और वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि बांधवगढ़ जैसे प्रतिष्ठित टाइगर रिजर्व में इस तरह की घटनाएं संकेत देती हैं कि बफर जोन में निगरानी और संसाधनों को और मजबूत करने की जरूरत है। जंगल की शांति के पीछे छिपे इन सवालों के जवाब अब जांच रिपोर्ट से ही मिलेंगे, लेकिन फिलहाल दो भालुओं की मौत ने वन प्रबंधन की जिम्मेदारी को फिर केंद्र में ला दिया है।
