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ओवरलोड राखड़ वाहनों पर प्रशासन की मिलीभगत का सवाल

Tapas Gupta

By Tapas Gupta

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ओवरलोड राखड़ वाहनों पर प्रशासन की मिलीभगत का सवाल

उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)

उमरिया जिले के बिरसिंहपुर पाली क्षेत्र में संचालित संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र से निकल रहे ओवरलोड राखड़ वाहनों का मामला एक बार फिर चर्चा में है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्लांट से रोजाना दर्जनों भारी भरकम वाहन राखड़ लादकर निकलते हैं, जो न केवल सड़कों को तबाह कर रहे हैं बल्कि आम जनता की जान-माल के लिए भी खतरा बन चुके हैं। प्रशासन और जिम्मेदार विभागों को कई बार शिकायतें भेजी गईं, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। सवाल यह उठता है कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर हो रहे इस खुले खेल को रोकने में प्रशासन क्यों नाकाम है।

जिम्मेदारों के बयान और जनता की पीड़ा

जब इस संबंध में SGTPS के इंचार्ज एसी मोहम्मद सदीक से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि जब भी उनके पास ओवरलोड वाहनों की शिकायत आती है, तो वे संबंधित कंपनी को पत्र लिखकर वाहनों को ब्लैक लिस्ट करने की प्रक्रिया अपनाते हैं। उन्होंने दावा किया कि प्लांट परिसर के भीतर और बाहर कई जगह कांटे लगे हुए हैं, जिन पर खाली और भरी गाड़ियों का वजन दर्ज होता है। यदि कोई वाहन ओवरलोड पाया जाता है, तो कंपनी को पत्र भेजकर उसे आगे न भेजने का निर्देश दिया जाता है। लेकिन जब उनसे यह पूछा गया कि अब तक कितने वाहनों को ब्लैक लिस्ट किया गया है, तो उनका जवाब गोलमोल रहा। उन्होंने केवल इतना कहा कि कंपनी को पत्र भेजा जाता है और फिर गाड़ी इधर नहीं आती, दूसरी जगह भेज दी जाती है।

इसी मामले में SGTPS डी संजय जोशी ने दावा किया कि प्लांट से ओवरलोड वाहन निकल ही नहीं सकते। उन्होंने कहा कि प्रशासन, पुलिस और सिक्योरिटी सब मिलकर काम कर रहे हैं। अगर ओवरलोड चल रहे हैं तो इसका मतलब है कि कोई विभाग अपना काम नहीं कर रहा। उन्होंने यह भी कहा कि जब उन्हें ओवरलोड वाहनों की जानकारी मिलती है तो कार्रवाई की जाती है।

यानी एक ओर अधिकारी स्वीकारते हैं कि ओवरलोड वाहन निकलते हैं और पत्र लिखने की बात करते हैं, वहीं दूसरे अधिकारी यह मानने को तैयार ही नहीं कि ओवरलोड निकलते हैं। दोनों बयानों में विरोधाभास साफ झलकता है।

 

मुख्य अभियंता की भूमिका पर सवाल

 

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्लांट से निकलने वाले वाहनों की जिम्मेदारी केवल निचले स्तर के अधिकारियों तक सीमित नहीं है। सबसे बड़ी जिम्मेदारी मुख्य अभियंता एच. के. त्रिपाठी की बनती है, जिनके निर्देशन में पूरा प्लांट संचालित होता है। सवाल यह उठता है कि जब रोजाना दर्जनों वाहन राखड़ लेकर निकल रहे हैं, तब मुख्य अभियंता को इसकी भनक क्यों नहीं है, या फिर वह जानबूझकर अनदेखी कर रहे हैं। जनता का आरोप है कि यदि मुख्य अभियंता चाहें तो ओवरलोड वाहनों पर तत्काल रोक लग सकती है, लेकिन उनकी चुप्पी इस खेल में क्यों है।

यातायात थाना प्रभारी सी के तिवारी ने भी जिम्मेदारी दूसरे पर डालते हुए कहा कि एसपी साहब ने सभी टीआई को निर्देश दिए हैं और अगर आप पाली थाना टीआई को सूचना दे दे तो वह भी कार्रवाई करेंगे। उन्होंने यह जरूर कहा कि उनकी चेकिंग के दौरान यदि कोई ओवरलोड वाहन पाया गया तो कार्रवाई होगी। सवाल यह है कि आखिर रोजाना निकलने वाले सैकड़ों ओवरलोड वाहनों की चेकिंग अब तक क्यों नहीं हो पाई।

पाली एसडीओपी शिवचरण बोहित ने कहा कि मामले की जांच की जाएगी और कार्रवाई की जाएगी।

जनता भुगत रही खामियाजा

ओवरलोड वाहनों के कारण पाली और आसपास की सड़कों की हालत बेहद खराब हो चुकी है। जहां-तहां गड्ढे हो गए हैं। धूल और राख के कारण राहगीरों का निकलना मुश्किल है। भारी वाहनों की तेज आवाज और धूल प्रदूषण ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है। दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन जानबूझकर इस मुद्दे पर आंख मूंदे बैठा है क्योंकि इसमें बड़े पैमाने पर मिलीभगत शामिल है।

प्रशासन पर उठ रहे सवाल

यह पहला मौका नहीं है जब बिरसिंहपुर पाली में ओवरलोड वाहनों की शिकायत उठी है। सालों से यह समस्या जस की तस बनी हुई है। जिम्मेदार अधिकारी हर बार जांच और कार्रवाई का आश्वासन देते हैं, लेकिन नतीजा शून्य रहता है। प्रशासन और पुलिस की उदासीनता से साफ है कि ओवरलोडिंग का यह खेल मिलीभगत से चल रहा है। अगर प्लांट से लेकर पुलिस प्रशासन तक सब सक्रिय होते तो यह समस्या कब की खत्म हो चुकी होती।

अब जनता कर रही है ठोस कदम की मांग

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि केवल कागजों में कार्रवाई या कंपनियों को पत्र लिखने से समस्या का हल नहीं निकलेगा। जरूरत है कि मौके पर नियमित चेकिंग हो, दोषी वाहनों को तुरंत जब्त किया जाए और उन कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाया जाए जो नियमों का उल्लंघन कर रही हैं।

ओवरलोड राखड़ वाहनों का यह खेल प्रशासन और जिम्मेदार विभागों की नाकामी को उजागर करता है। अधिकारियों के बयान केवल औपचारिकता हैं, जिनका जमीनी हकीकत से कोई लेना-देना नहीं। खासतौर पर मुख्य अभियंता एच. के. त्रिपाठी की जिम्मेदारी सबसे बड़ी है, लेकिन उनकी खामोशी कई सवाल खड़े करती है। जब तक प्रशासन सख्त कदम नहीं उठाता, तब तक जनता परेशान होती रहेगी और सड़कों पर खतरा बना रहेगा। अब वक्त आ गया है कि प्रशासन केवल बयानबाजी छोड़कर कार्रवाई करे, वरना जनता का आक्रोश सड़कों पर उतरना तय है।

Tapas Gupta

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मै तपस गुप्ता 9 सालों से लगातार पत्रकारिता मे सक्रिय हूं, समय पर और सटीक जानकारी उपलब्ध कराना ही मेरी पहली प्राथमिकता है। मो-7999276090

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