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वर्दी में कर्तव्य, आस्था में समर्पण,कुसमी थाना प्रभारी अरुणा द्विवेदी ने ड्यूटी निभाने के बाद रखा बट सावित्री व्रत

अमित श्रीवास्तव

By अमित श्रीवास्तव

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वर्दी में कर्तव्य, आस्था में समर्पण,कुसमी थाना प्रभारी अरुणा द्विवेदी ने ड्यूटी निभाने के बाद रखा बट सावित्री व्रत

एमपी के सीधी जिले के आदिवासी अंचल कुसमी में शनिवार को बट सावित्री व्रत का पर्व बड़े ही श्रद्धा, उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। भीषण गर्मी और लगभग 40 डिग्री तापमान के बीच सुहागिन महिलाएं नंगे पैर बट वृक्ष की परिक्रमा कर अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती नजर आईं। इस दौरान कुसमी थाना प्रभारी अरुणा द्विवेदी ने भी अपने पति की दीर्घायु के लिए व्रत रखकर पूजा-अर्चना की और कर्तव्य व संस्कार का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया।

वही थाना प्रभारी अरुणा द्विवेदी ने बताया कि वह अपनी पुलिस ड्यूटी के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और पतिव्रत धर्म का भी पूरी निष्ठा से पालन करती हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार वह सभी प्रमुख व्रत और त्योहार रखती हैं। शनिवार सुबह सबसे पहले उन्होंने थाना पहुंचकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया, स्टाफ की ड्यूटी लगाई तथा प्राप्त आवेदनों की जांच के लिए अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी। इसके बाद सुबह लगभग 10 बजे वह अन्य महिला पुलिसकर्मियों, पुलिसकर्मियों की पत्नियों और ग्रामीण महिलाओं के साथ बट वृक्ष के नीचे पूजा-अर्चना में शामिल हुईं।

जहा उन्होंने कहा कि पुलिस सेवा में रहते हुए परिवार और त्योहारों के लिए समय निकालना आसान नहीं होता। कई बार पति-पत्नी एक साथ त्योहार भी नहीं मना पाते, क्योंकि ड्यूटी सबसे पहले आती है। इसके बावजूद वह अपने पारिवारिक और धार्मिक दायित्वों का पालन करने का प्रयास करती हैं। थाना प्रभारी के पति पुनीत तिवारी ग्राम मनिकवार जिला रीवा के निवासी हैं। अरुणा द्विवेदी इससे पहले जबलपुर, रीवा, उमरिया और सीधी जिलों में भी थाना प्रभारी के रूप में अपनी सेवाएं दे चुकी हैं।

सीधी जिले के कुसमी क्षेत्र में सुबह से ही बट सावित्री व्रत को लेकर उत्साह दिखाई दिया। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सजकर बट वृक्ष के नीचे पहुंचीं और विधि-विधान से पूजा कर पति की लंबी उम्र की कामना की। आदिवासी अंचल में यह पर्व सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी माना जाता है।

क्यों मनाया जाता है बट सावित्री व्रत?

सम्पूर्ण भारत मे बट सावित्री व्रत हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं का प्रमुख पर्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता सावित्री ने अपने तप, बुद्धिमत्ता और पतिव्रता धर्म के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। उसी कथा की स्मृति में महिलाएं वट यानी बरगद के वृक्ष की पूजा कर अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। बरगद के वृक्ष को दीर्घायु और स्थायित्व का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इस दिन उसकी विशेष पूजा की जाती है।

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