जनपद अध्यक्ष के गृह क्षेत्र में नल-जल योजना बनी शोपीस, ग्रामीणों ने उठाए सवाल
उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)
जिले के बिरसिंहपुर पाली जनपद क्षेत्र में पेयजल संकट लगातार गहराता जा रहा है। सबसे अधिक चर्चा इस बात की हो रही है कि जिस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व जनपद अध्यक्ष मनीष सिंह (बब्लू) करते हैं, उसी क्षेत्र की कई ग्राम पंचायतों में नल-जल योजना महीनों से बंद पड़ी हुई है। हालात ऐसे हैं कि जनपद अध्यक्ष के गृह ग्राम धौरई के बैगा मोहल्ले तक में नल-जल योजना का लाभ नहीं पहुंच पा रहा है। इससे ग्रामीणों के बीच नाराजगी बढ़ती जा रही है।
जानकारी के अनुसार धौरई के अलावा ममान, बकेली, ओदरी, सलैया-1, मेंढ़की सहित कई ग्राम पंचायतों में नल-जल योजना केवल नाम मात्र की रह गई है। गांवों में बिछी पाइपलाइन और लगे हुए नल अब शोपीस बनकर रह गए हैं। जिन योजनाओं का उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना था, वे आज खुद अपनी उपयोगिता पर सवाल खड़े कर रही हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि कई महीनों से नलों में पानी नहीं आया है। मजबूरी में लोग हैंडपंप, कुओं और नदी-नालों के पानी पर निर्भर हैं। महिलाओं और बच्चों को रोजाना पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। गर्मी के दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, लेकिन जिम्मेदारों की ओर से कोई ठोस पहल दिखाई नहीं दे रही है।
सबसे बड़ा सवाल जनपद अध्यक्ष की भूमिका को लेकर उठ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जनपद अध्यक्ष अपने गृह ग्राम और आसपास के गांवों में ही पेयजल व्यवस्था को सुचारू नहीं करा पा रहे हैं, तो पूरे जनपद की समस्याओं के समाधान के दावों पर कैसे भरोसा किया जाए। स्थानीय लोग पूछ रहे हैं कि आखिर जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही कब तय होगी और जनता को मूलभूत सुविधाएं कब मिलेंगी।
चुनाव के दौरान विकास, पानी, सड़क और अन्य सुविधाओं को लेकर बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव समाप्त होते ही जनसमस्याएं भी नेताओं की प्राथमिकताओं से बाहर हो जाती हैं। यही वजह है कि आज जनपद अध्यक्ष के गृह क्षेत्र में ही लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग और संबंधित अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बनी योजनाएं यदि पानी नहीं दे पा रही हैं, तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। लोगों का मानना है कि जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक नल-जल योजना के नाम पर ग्रामीणों को केवल आश्वासन ही मिलता रहेगा।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जनपद अध्यक्ष और प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कब संज्ञान लेते हैं और कब तक ग्रामीणों को उनके घरों तक नियमित पेयजल उपलब्ध हो पाता है।


