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बांधवगढ़ में लापरवाही की कीमत चुका रहे वन्यजीव, पार्क प्रबंधन के दावों के बीच बढ़ती मौतें

Tapas Gupta

By Tapas Gupta

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बांधवगढ़ में लापरवाही की कीमत चुका रहे वन्यजीव, पार्क प्रबंधन के दावों के बीच बढ़ती मौतें

उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व एक बार फिर वन्यजीवों की रहस्यमयी मौतों को लेकर सवालों के घेरे में है। जनवरी माह में चार बाघों की मौत के बाद अब भालुओं की लगातार मौत ने पार्क प्रबंधन की कार्यप्रणाली, निगरानी व्यवस्था और दावों की पोल खोल दी है। हर घटना के बाद जांच, डॉग स्क्वाड और पोस्टमॉर्टम की औपचारिकता निभाई जा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने हुए हैं।

ताजा मामला पनपथा बफर परिक्षेत्र का है, जहां गश्ती के दौरान लगभग चार वर्षीय नर भालू का शव मिला। प्रबंधन ने इसे प्राकृतिक मृत्यु बताया है। इससे पहले मानपुर बफर क्षेत्र में दो भालुओं की मौत हुई थी, जिनमें एक मादा और एक अवयस्क नर शामिल था। उस मामले में संभावित कारण अन्य वन्यप्राणी से संघर्ष बताया गया। सवाल यह है कि यदि सब कुछ सामान्य है, तो इतनी कम अवधि में अलग-अलग क्षेत्रों में लगातार मौतें क्यों हो रही हैं?

पार्क प्रबंधन हर घटना के बाद यह स्पष्ट करता है कि शवों के सभी अंग सुरक्षित हैं, मेटल डिटेक्टर से जांच हुई है और कोई संदिग्ध गतिविधि नहीं मिली। लेकिन बार-बार कुछ भी संदिग्ध नही कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेना क्या पर्याप्त है? क्या बफर जोन में गश्त, निगरानी और स्वास्थ्य मॉनिटरिंग केवल कागजों तक सीमित रह गई है?

वन्यजीव विशेषज्ञों की मानें तो प्राकृतिक मृत्यु और आपसी संघर्ष की आड़ में कई बार प्रबंधन अपनी विफलताओं को ढकने की कोशिश करता है। पानी, भोजन, सुरक्षित मूवमेंट कॉरिडोर और मानवीय दखल जैसे मुद्दों पर गंभीरता से काम न होने का खामियाजा सीधे वन्यजीवों को भुगतना पड़ता है।

सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि जनवरी जैसे छोटे से समय अंतराल में चार बाघ और अब कई भालू अपनी जान गंवा चुके हैं। यह आंकड़ा अपने आप में चेतावनी है, लेकिन पार्क प्रबंधन इसे भी सामान्य घटनाक्रम बताने में लगा हुआ है। न तो किसी स्वतंत्र जांच की बात हो रही है और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी की जवाबदेही तय की गई है।

स्थानीय लोगों और वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो बांधवगढ़ की पहचान ही खतरे में पड़ सकती है। सवाल सीधा है क्या पार्क प्रबंधन सिर्फ मौतों की गिनती करेगा या वास्तव में वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदारी लेगा? जवाब अब भी इंतजार में है।

Tapas Gupta

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मै तपस गुप्ता 9 सालों से लगातार पत्रकारिता मे सक्रिय हूं, समय पर और सटीक जानकारी उपलब्ध कराना ही मेरी पहली प्राथमिकता है। मो-7999276090

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