गांधी ताप विद्युत केंद्र में मजदूर गंभीर घायल, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)
जिले का संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर चर्चाओं में है। इस बार मामला ओल्ड सीएचपी साइट में हाईमास्ट लाइट लगाने के दौरान हुए हादसे का है, जहां काम कर रहे एक मजदूर के गंभीर रूप से घायल होने की खबर सामने आई है। घटना के बाद ताप विद्युत केंद्र की कार्यप्रणाली, ठेका कंपनियों की भूमिका और मजदूरों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार ताप विद्युत केंद्र की ओल्ड सीएचपी साइट में पैरोटेक नामक कंपनी द्वारा हाईमास्ट लाइट लगाने का कार्य कराया जा रहा था। चर्चा है कि इसी दौरान अधिकारियों की कथित मिलीभगत से दूसरे ठेका कंपनी राधा चेन्नई के मजदूर को हाईमास्ट पर काम करने के लिए लगाया गया। बताया जा रहा है कि मजदूर को तकनीकी कार्य के लिए प्रेरित किया गया, जबकि वह इस तरह के काम के लिए प्रशिक्षित नहीं था।
मिली जानकारी के मुताबिक काम के दौरान अचानक हाइड्रा ऊपर चढ़ गई, जिससे संतुलन बिगड़ने पर मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे में उसके पैर में गंभीर चोट आई है। घायल मजदूर की पहचान मुकेश रैदास निवासी एसपीओ टाइप एमपीईबी के रूप में हुई है। घटना के तुरंत बाद उसे सीधे शहडोल के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार जारी है।
घटना के बाद ताप विद्युत केंद्र परिसर में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर गैर तकनीकी मजदूर से इतना जोखिम भरा कार्य क्यों कराया गया। यदि हाईमास्ट जैसी ऊंचाई वाले कार्य में सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता, प्रशिक्षित कर्मचारी लगाए जाते और पर्याप्त निगरानी रहती, तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था।
स्थानीय लोगों और कर्मचारियों के बीच यह भी चर्चा है कि जिस कंपनी को काम मिला था, उसके बजाय दूसरी कंपनी के मजदूरों से कार्य कराया जा रहा था। ऐसे में यह मामला केवल एक हादसे तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि ठेका प्रक्रिया और श्रम नियमों पर भी सवाल खड़े करता है। आखिर किसकी अनुमति से दूसरे कंपनी के मजदूरों को कार्यस्थल पर लगाया गया और क्या उनके पास सुरक्षा उपकरण एवं तकनीकी प्रशिक्षण था, यह जांच का विषय बन गया है।

इस पूरे मामले को लेकर जब अधीक्षण अभियंता टी.एन. सिंह से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि उन्हें घटना की जानकारी नहीं थी। उन्होंने बताया कि वह ईडी ऑफिस में थे और फोन आने के बाद उन्हें मामले की सूचना मिली। उन्होंने कहा कि वह अभी दो-तीन दिन पहले ही पदस्थ हुए हैं और मामले की पूरी जानकारी जुटा रहे हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पैरोटेक नामक कंपनी द्वारा हाईमास्ट लाइट लगाने का कार्य किया जा रहा है।
गौरतलब है कि संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र पहले भी सुरक्षा व्यवस्थाओं और कार्यस्थल पर लापरवाही को लेकर सुर्खियों में रह चुका है। ऐसे में एक बार फिर हुए इस हादसे ने मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रबंधन इस मामले में जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी चर्चाओं तक ही सीमित रह जाएगा।


