बनते ही टूट गया 15 लाख का चेक डैम
तकनीकी अमला की जिम्मेदारी सिर्फ कागजों तक सीमित
संजय सिंह मझौली
जनपद क्षेत्र मझौली अंतर्गत ग्राम पंचायत पांड में नवनिर्मित चेक डैम निर्माण के दो माह में ही टूट कर धराशाई हो गया है जिस कारण तकनीकी अमला सवालों के घेरे में आ गया है ऐसे में ग्रामीणों के मुताबिक तकनीकी अमला की जिम्मेदारी सिर्फ कागजों तक सीमित है कार्यस्थल पर जाना उचित नहीं समझा जाता है कमरे में ही कमीशन के आधार पर टी एस एवं मूल्यांकन कर दिया जाता है लेकिन इतनी बड़ी राशि का दुरुपयोग तकनीकी अमले के टी एस एवं मूल्यांकन के आधार पर हुआ है जिस कारण ग्रामीणों के माने तो निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायत के साथ-साथ तकनीकी अमला भी इस भ्रष्टाचार में बराबर का जिम्मेदार है।
50 मीटर दूर पूर्व में बना टूट चुका है
निर्माण स्थल से महज 50 मीटर की दूरी पर 2 वर्ष पहले इसी तरह चेक डैम बना था जो टूट चुका है फिर यहां पर निर्माण कार्य का क्या औचित्य है और क्या उपयोगिता है इस पर न तो निर्माण एजेंसी और ना ही तकनीकी अमला विचार किया जबकि ग्रामीणों के मुताबिक यह पड़वारी नदी बारहमासी बहती है फिर चेक डैम निर्माण की क्या जरूरत थी। मामले को लेकर निर्माण एजेंसी एवं उपयंत्री से मोबाइल फोन पर संपर्क किया गया लेकिन नहीं हो सका।
इनका कहना
हमारे मोहल्ला नदी टोला में पीसीसी सड़क की जरूरत थी लेकिन चेक डैम बनाया गया है जिसमें बड़े-बड़े बोल्डर डालकर ऊपर से प्लास्टर कर दिया गया था जो टूट कर बह गया है।
दशरथ यादव ग्रामीण
सड़क में कीचड़ होने के कारण 15 दिन से बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं जिसकी चिंता ग्राम पंचायत को नहीं है बजट डकारने के लिए बिना उपयोगिता के चेक डैम बनाया गया था जो टूट गया है।
पदमा मिश्रा ग्रामीण
यहां चेक डैम की कोई उपयोगिता नहीं है पहले भी एक बनाया गया था जो टूट गया है, यह नदी बारहमासी बहती है।
विनोद यादव ग्रामीण
चेक स्वीकृत था लेकिन टूटने की जानकारी हमें नहीं है मजदूरी भुगतान हुआ होगा और मटेरियल का भुगतान अभी हमारे संज्ञान में नहीं है कार्य की उपयोगिता है या कि नहीं यह सारी जानकारी पता करके बताती हूं।
सरिता सिंह एसडीओ ग्रामीण यांत्रिकी सेवा मझौली