आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण ठंडे बस्ते में,
किसी ने नहीं लिया गोद, कहीं जर्जर भवन तो कहीं किराए के मकान में संचालित हो रहे केंद्र।
जान जोखिम में डाल टपकती छत के नीचे बैठने को मजबूर नौनिहाल
सीधी। प्रदेश सरकार द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों की दशा और दिशा सुधारने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कुछ समय पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों एवं क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों को गोद लेकर वहां आवश्यक व्यवस्थाएं दुरुस्त करने की पहल भी शुरू की गई थी। इसके बावजूद शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक संचालित कई आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है।
आंगनबाड़ी केंद्रों की सबसे बड़ी समस्या उनके भवनों को लेकर सामने आ रही है। कई केंद्र दशकों पुराने और जर्जर भवनों में संचालित हो रहे हैं, जहां नौनिहालों की सुरक्षा पर हर समय खतरा बना रहता है। वहीं अनेक केंद्र किराए के भवनों में संचालित किए जा रहे हैं, जहां पेयजल, शौचालय सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं का अभाव है।
किराए के भवनों में भी परेशानी
किराए के भवनों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति भी बेहतर नहीं है। बताया जाता है कि कई स्थानों पर भवन मालिकों को समय पर किराया नहीं मिलने के कारण केंद्रों को बार-बार स्थान बदलना पड़ता है। इससे बच्चों के साथ-साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
बारिश के दिनों बढ़ जाती है समस्या
बरसात के मौसम में जर्जर आंगनबाड़ी भवनों की स्थिति और भी खराब हो जाती है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के अनुसार कई भवनों की छत से पानी टपकने लगता है। कहीं छत का प्लास्टर उखड़कर नीचे गिरता है तो कहीं भवन के अंदर पानी भर जाता है। ऐसी स्थिति में बच्चों के बैठने तक की जगह नहीं बचती। लगातार बारिश होने पर केंद्र बंद करने की नौबत तक आ जाती है।
केस नंबर-1 : हरर्हा आंगनबाड़ी केंद्र की हालत खराब
हरर्हा आंगनबाड़ी केंद्र में पदस्थ कार्यकर्ता ने बताया कि केंद्र का भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। भवन की छत से बारिश के दौरान पानी का रिसाव होता है। इतना ही नहीं, छत में किया गया पुराना प्लास्टर भी उखड़कर नीचे गिरता रहता है। ऐसे में केंद्र में आने वाले छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर हमेशा खतरा बना रहता है।
जिम्मेदारों की अनदेखी से बढ़ रही परेशानी
आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले नौनिहालों को बेहतर वातावरण और सुरक्षित भवन उपलब्ध कराना विभाग की जिम्मेदारी है। इसके बावजूद जर्जर भवनों में केंद्रों का संचालन होना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। जरूरत है कि विभाग ऐसे सभी केंद्रों का सर्वे कराकर जर्जर भवनों की मरम्मत अथवा नए भवनों का निर्माण शीघ्र कराए, ताकि मासूम बच्चों को जान जोखिम में डालकर आंगनबाड़ी केंद्र आने के लिए मजबूर न होना पड़े।