क्या नदी का पानी लाकर बच्चों को पिलाएं?” — जर्जर स्कूल भवन पर प्रधानाध्यापिका का गंभीर सवाल

“क्या नदी का पानी लाकर बच्चों को पिलाएं?” — जर्जर स्कूल भवन पर प्रधानाध्यापिका का गंभीर सवाल, BRC पर धमकी देने के आरोप का वीडियो वायरल

सीधी जिले के सिहावल से शिक्षा व्यवस्था को लेकर बेहद गंभीर तस्वीर सामने आई है। सिहावल जनसुनवाई के दौरान कलेक्टर की मौजूदगी में शासकीय प्राथमिक कन्या शाला सिहावल की प्रधानाध्यापिका ने स्कूल की बदहाल व्यवस्थाओं को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए।

प्रधानाध्यापिका का कहना है कि 1950 में बना स्कूल भवन अब पूरी तरह जर्जर हो चुका है और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। इतना ही नहीं, स्कूल में बच्चों के लिए पेयजल व्यवस्था को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा—“क्या नदी से पानी लाकर बच्चों को पिलाया जाए?”

सिहावल की जनसुनवाई में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा यह मामला उस वक्त सुर्खियों में आ गया, जब शासकीय प्राथमिक कन्या शाला की प्रधानाध्यापिका ने कलेक्टर के सामने स्कूल की जर्जर हालत का मुद्दा उठाया।

प्रधानाध्यापिका के मुताबिक स्कूल भवन का निर्माण वर्ष 1950 में हुआ था और मौजूदा स्थिति में भवन की हालत बेहद खराब है। उनका आरोप है कि जर्जर भवन में बच्चों की सुरक्षा को लेकर लगातार खतरा बना हुआ है।

मामला सिर्फ जर्जर भवन तक सीमित नहीं है। स्कूल में पेयजल व्यवस्था को लेकर भी प्रधानाध्यापिका ने गंभीर सवाल उठाए।

उनका कहना है कि अगर स्कूल में बच्चों के लिए पर्याप्त पानी की व्यवस्था नहीं है, तो आखिर बच्चों को पानी कहां से पिलाया जाए? क्या नदी से पानी लाकर बच्चों को पिलाया जाए?

जनसुनवाई में उठे इन सवालों ने स्थानीय शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक इंतजामों पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

 BRC पर आरोप

इसी दौरान मामला और गंभीर तब हो गया, जब प्रधानाध्यापिका की ओर से BRC पर कथित तौर पर धमकी देने के आरोप लगाए गए।

मीडिया कैमरों के सामने हुई कथित बातचीत का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें प्रधानाध्यापिका और BRC के बीच तीखी बातचीत दिखाई दे रही है।

अब इस वीडियो ने पूरे मामले को और तूल दे दिया है। हालांकि, वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि और उसमें कही गई बातों का पूरा संदर्भ सामने आना अभी बाकी है।

एक तरफ जर्जर स्कूल भवन में पढ़ रहे बच्चों की सुरक्षा का सवाल है, तो दूसरी तरफ पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा को लेकर उठ रहे सवाल।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर स्कूल भवन वाकई हादसे की आशंका से जूझ रहा है, तो जिम्मेदार विभाग की ओर से अब तक क्या कार्रवाई की गई?

और प्रधानाध्यापिका द्वारा लगाए गए आरोपों पर शिक्षा विभाग और संबंधित अधिकारियों का क्या पक्ष है—यह भी सामने आना बेहद जरूरी है। आधिकारिक प्रतिक्रिया के बाद इस मामले की तस्वीर और साफ हो सकेगी।

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