मधुवन गौशाला धनौर में नारकीय जीवन जी रहे गौवंश
गौशाला प्रबंधन के नाम पर बजट डकार रहे जिम्मेदार
संजय सिंह मझौली
एक तरफ जहां आवारा गोवंश के लिए प्रदेश सरकार के द्वारा लाखों रुपए के गौशाला निर्माण कराए गए हैं जिनमें गोवंश के रखरखाव एवं आहार के लिए बजट भी दिया जाता है लेकिन जनपद क्षेत्र मझौली अंतर्गत मधुबन गौशाला धनौर में गोवंश नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं जबकि गोवंश के नाम पर जारी बजट को जिम्मेदारों के द्वारा कागजों में खर्च कर डकारा जा रहा है जिसकी पोल उस समय खुली जब बजरंग दल के कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा आकस्मिक गौशाला का निरीक्षण किया गया।
जानकारी के अनुसार, 6 सितंबर को बजरंग दल प्रखंड मझौली के कार्यकर्ता क्षेत्रीय ग्रामीणों की शिकायत पर गौशाला पहुंचे।जहां गौशाला में गौवंश के रहने की स्थिति बेहद खराब और दयनीय पाई गई।गौवंश के रहने वाले स्थान पर नियमित साफ-सफाई नहीं होने के कारण वहां कीचड़ और गंदगी जमा है।कई स्थानों पर गौवंश के खड़े होने तक के लिए पर्याप्त जगह नहीं है।
साफ-सफाई और व्यवस्था पर उठे सवाल
गौशाला में गौवंश के लिए मूलभूत सुविधाओं का जैसे शुद्ध पानी,आहार के पर्याप्त इंतजाम नहीं है।गौवंश को असुविधाजनक और अस्वच्छ वातावरण में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है।
गौवंश छोड़ने के लिए पैसे मांगने का आरोप
कार्यकर्ताओं ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यदि कोई ग्रामीण अपने गौवंश को गौशाला में छोड़ने के लिए लेकर जाता है तो कथित तौर पर उससे एक गौवंश के लिए 500 से 1000 रु तक की राशि की मांग की जाती है।उनका कहना है कि जब सरकार की ओर से गौवंश के भोजन और रहने की व्यवस्था के लिए राशि उपलब्ध कराई जाती है, तो किसानों और ग्रामीणों से अतिरिक्त पैसे मांगने का औचित्य क्या है।
जांच और कार्रवाई की मांग
मधुवन गौशाला की स्थिति को लेकर अब प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने और गौशाला में गौवंश के लिए बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई है। साथ ही,यदि ग्रामीणों से गौवंश छोड़ने के नाम पर राशि लिए जाने के आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध कार्रवाई किए जाने की भी मांग की गई है।
गौशालाओं के प्रबंधन पर बजरंग दल ने जताई चिंता
बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के मुताबिक सिर्फ मधुबन गौशाला में ही यह आलम नहीं है बल्कि अन्य संचालित गौशालाओं में भी इसी तरह का आलम बना हुआ है।ऐसे में शासन प्रशासन की जिम्मेदारी है कि समय-समय पर निरीक्षण कर दिशा निर्देश जारी करते रहना चाहिए ताकि संचालित गौशालाओं में गोवंशों को सुरक्षित और सुव्यवस्थित तरीके से रखा जा सके अन्यथा गौशालयों का औचित्य ही समाप्त हो जाएगा जो चिंता की बात है।
इनका कहना
ग्रामीणों की शिकायत पर हम अपनी टीम के साथ गौशाला पहुंचे थे जहां गौशाला में काफी अव्यवस्था एवं मनमानी का आलम देखा गया।वहीं पशुओं को गौशाला में लाने पर प्रति गोवंश 500 से 1000 रुपए वसूले जाते हैं।
रीतेश मिश्रा कार्यकर्ता बजरंग दल प्रखंड मझौली
अगर शासन स्तर से गोवंश की व्यवस्था के लिए बजट आता है वह कहां जाता है व्यवस्था क्यों नहीं की जाती है और अलग से राशि क्यों ली जाती है इसकी जांच होनी चाहिए।
रामानुज कोल कार्यकर्ता बजरंग दल
अगर गौशाला में इस तरह का आलम है तो मैं खुद जाकर निरीक्षण करूंगी और कड़े दिशा निर्देश जारी किए जाएंगे। लापरवाही पाई जाएगी तो कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी।
*सुरभि श्रीवास्तव सीईओ जनपद पंचायत मझौली*