वन विभाग की दोहरी कार्रवाई का आरोप, सामान्य और पिछड़ों को छोड़ आदिवासियों का उजाड़ा आशियाना

वन विभाग की दोहरी कार्रवाई का आरोप, सामान्य और पिछड़ों को छोड़ आदिवासियों का उजाड़ा आशियाना

सिंगरौली जिले के करथुआ, बिछिया और पराई क्षेत्र में वन विभाग द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। 

ग्रामीणों ने वन विभाग पर दोहरी और भेदभावपूर्ण कार्रवाई का गंभीर आरोप लगाया है। 

आरोप है कि विभाग ने सामान्य और पिछड़ा वर्ग के रसूखदारों के अतिक्रमण को छोड़ दिया, जबकि गरीब आदिवासियों के आशियानों को निशाना बनाकर उन्हें उजाड़ दिया गया।

क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, वन विभाग की टीम भारी पुलिस बल के साथ करथुआ और बिछिया के वन क्षेत्रों में अतिक्रमण हटाने पहुंची थी। 

इस दौरान विभाग ने कई कच्चे मकानों और झोपड़ियों को ढहा दिया। 

कार्रवाई के बाद बेघर हुए आदिवासी परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है।

पीड़ितों का कहना है कि वे पीढ़ियों से इस जमीन पर रह रहे हैं और उनके पास इसके अलावा रहने का कोई दूसरा ठिकाना नहीं है।

पक्षपात के गंभीर आरोप

स्थानीय ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि वन विभाग की यह कार्रवाई पूरी तरह से एकतरफा थी।

 क्षेत्र में सामान्य और पिछड़ा वर्ग के कई प्रभावशाली लोगों ने भी वन भूमि पर बड़े पैमाने पर कब्जे कर रखे हैं, लेकिन उनके खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

 विभाग की इस चयनात्मक कार्रवाई से वन विभाग की निष्पक्षता पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।

पीड़ितों की मांग और विरोध

आदिवासी समाज और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस कार्रवाई का कड़ा विरोध किया है। 

उनका कहना है कि

 इस मौसम में परिवारों को बिना किसी पुनर्वास व्यवस्था के बेघर कर दिया गया।

आदिवासियों के पारंपरिक वन अधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला और भेदभाव करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन होगा।

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