बच्चों की मौतों से हड़कंप! सरकारी आंकड़े 8, जमीनी दावे 19 तक—आखिर सच क्या है?

बालाघाट में बच्चों की मौतों से हड़कंप! सरकारी आंकड़े 8, जमीनी दावे 19 तक—आखिर सच क्या है?

बालाघाट जिले के बिरसा ब्लॉक के बैगा-गोंड बहुल गांवों में बच्चों की मौतों ने गंभीर चिंता खड़ी कर दी है। सरकारी रिकॉर्ड में हाल की 8 बच्चों की मौत दर्ज है, जबकि जमीनी पड़ताल में यह संख्या 19 तक होने का दावा किया गया है। इतना ही नहीं, मातला और मछुरदा गांवों में हुई 6 मौतों के सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज न होने की बात भी सामने आई है।

ग्रामीणों का आरोप है कि कई गांवों में करीब 6 महीने से टेक होम राशन और पोषण आहार नहीं मिला। पर्याप्त मच्छरदानियां नहीं मिलने और मलेरिया के मामलों के बीच कई बच्चों के गंभीर रूप से बीमार होने की जानकारी भी सामने आई है।

सबसे बड़ी चिंता कुपोषण, साफ पानी, भोजन और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर है। कुछ ग्रामीण परिवारों के नदी-नालों के पानी पर निर्भर होने की बात भी सामने आई है।

हालांकि, बालाघाट कलेक्टर कुमार सत्यम ने सभी 19 मौतों को हाल की 8 मौतों से जोड़ना सही नहीं बताया है।

अब सवाल यह है—क्या आदिवासी इलाकों में सरकारी पोषण और स्वास्थ्य योजनाएं जमीन तक पहुंच रही हैं?

 पूरी खबर पढ़िए और जानिए बालाघाट के इन गांवों की जमीनी हकीकत।

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