Mpnews:बांधवगढ़ में फिर बुझी जंगल की दहाड़,16 दिनों में तीसरे टाइगर की मौत से हिला वन तंत्र, बाघ संरक्षण पर गहराता संकट
Mpnews: देश-दुनिया में टाइगर स्टेट के रूप में पहचान बना चुके मध्य प्रदेश में बाघ संरक्षण को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 16 दिनों के भीतर तीसरी बार एक बाघ की मौत सामने आई है। ताजा घटना ने न सिर्फ वन विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लगाया है, बल्कि वाइल्ड लाइफ प्रेमियों और टाइगर एक्सपर्ट्स की चिंता भी बढ़ा दी है।
यह मामला उमरिया जिला मुख्यालय से सटे पुटपुरा क्षेत्र का है, जहां पुलिस लाइन के पास स्थित एक खेत में बाघ का शव मिला। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बाघ लंबे समय तक निष्क्रिय अवस्था में पड़ा दिखाई दिया। पहले ग्रामीणों को लगा कि बाघ आराम कर रहा है, लेकिन काफी देर तक कोई हलचल न होने पर लोगों को अनहोनी की आशंका हुई। इसके बाद तत्काल वन विभाग को सूचना दी गई।
Mpnews:सूचना मिलते ही बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व और उमरिया सामान्य वन मंडल के अधिकारी मौके पर पहुंचे। जांच के दौरान बाघ मृत पाया गया, जिसके बाद पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई। क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय ने बताया कि बाघ का शव पुटपुरा गांव के खेत में मिला है, जो पिपरिया धमोखर बीट के बफर जोन अंतर्गत आता है। यह स्थान वन कंपार्टमेंट से लगभग 700 मीटर की दूरी पर स्थित है।
वन विभाग का कहना है कि मामले की जांच राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर के तहत की जाएगी। शनिवार को पोस्टमॉर्टम और अन्य कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। फिलहाल बाघ की मौत के कारणों का खुलासा नहीं हो सका है।
गौरतलब है कि साल की शुरुआत में ही मध्य प्रदेश तीन बाघों को खो चुका है और बांधवगढ़ जैसे संवेदनशील टाइगर रिजर्व में इतनी कम अवधि में लगातार मौतों ने संरक्षण व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह लापरवाही है, मानव-वन्यजीव संघर्ष का नतीजा, या किसी गहरी साजिश की ओर इशारा—इन सवालों के जवाब अब पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही सामने आएंगे। फिलहाल, जंगल की खामोशी हर किसी को चिंता में डाल रही है।
