जहां लड़कियों की पढ़ाई पर थी पाबंदी, वहीं से उठी अफसर बनने की कहानी: किसान की बेटी मोना बनीं dipti collector
जिस गांव में लड़कियों को स्कूल भेजना गुनाह समझा जाता था, उसी गांव से निकलकर किसान की बेटी मोना ने dipti collector बनकर इतिहास रच दिया। सामाजिक रूढ़ियों, आर्थिक तंगी और संसाधनों की कमी के बावजूद मोना ने अपने सपनों को मरने नहीं दिया, बल्कि अपने संघर्ष को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया।
मोना का जन्म एक साधारण किसान परिवार में हुआ। गांव का माहौल ऐसा था, जहां लड़कियों की पढ़ाई को गैर-जरूरी माना जाता था। कई बार परिवार और समाज की ओर से ताने मिले, रोक-टोक हुई, लेकिन मोना के भीतर कुछ कर गुजरने की जिद थी। उन्होंने तय कर लिया था कि हालात चाहे जैसे हों, पढ़ाई नहीं छोड़ेंगी।
शुरुआती शिक्षा के बाद जब उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की, तब आर्थिक चुनौतियां और ज्यादा बढ़ गईं। घर की हालत ऐसी नहीं थी कि कोचिंग और किताबों का खर्च आसानी से उठाया जा सके। ऐसे कठिन समय में मोना ने हार मानने के बजाय खुद रास्ता निकाला। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया, ताकि अपनी जरूरतों को खुद पूरा कर सकें और परिवार पर बोझ न बनें।
दिन में ट्यूशन, रात में खुद की पढ़ाई,मोना का जीवन इसी संघर्ष के बीच गुजरने लगा। कई बार थकान और निराशा ने घेरने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने हर बार खुद को संभाला। मोना का मानना था कि अगर हालात कठिन हैं तो मंजिल भी उतनी ही बड़ी होगी।
उनकी मेहनत आखिरकार रंग लाई। MPPSC 2022 की परीक्षा में मोना ने 34वीं रैंक हासिल कर ली। इस सफलता के साथ ही वह वाणिज्य कर निरीक्षक (CTI) के पद पर चयनित हुईं। बाद में dipti collector के रूप में उनका चयन हुआ, जिसने न सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरे गांव की सोच बदल दी।
