KYC की सख्ती ने खोली फ्री राशन की हकीकत, एमपी में 25 लाख नए आवेदनों में 5 लाख परिवार गायब
भोपाल: मुफ्त राशन की बढ़ती मांग के बीच मध्य प्रदेश में शुरू हुई KYC की सख्ती ने चौंकाने वाली तस्वीर सामने ला दी है. बीते 10 महीनों में 25 लाख परिवारों ने योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन किया, लेकिन जैसे ही आधार, बैंक खाता, समग्र आईडी और मोबाइल सत्यापन की प्रक्रिया शुरू हुई, 5 लाख परिवारों ने कोई जवाब ही नहीं दिया. विभाग अब इसे महज तकनीकी कमी नहीं, बल्कि अपात्र और संदिग्ध दावों की बड़ी स्क्रीनिंग मान रहा है.
स्मार्ट पीडीएस सिस्टम से बदला खेल
जानकारी के अनुसार प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत 28 श्रेणियों में 1.28 करोड़ परिवार राशन ले रहे हैं. इस तरह प्रदेश में करीब 5.23 करोड़ लोग मुफ्त राशन का लाभ ले रहे हैं. केंद्र में स्मार्ट पीडीएस मॉडल के लागू होते ही पूरा डेटा केंद्रीय सर्वर से जोड़ा गया और KYC अनिवार्य कर दी गई. इस डिजिटल फिल्टर के बाद अधिकारियों का मानना है कि यह सबसे बड़ा डेटा क्लीनअप है, जिसने वर्षों से जमा अपात्र नामों को चिन्हित किया है.
भोपाल में हर महीने 12 करोड़ रुपये का मुफ्त राशन
वही भोपाल की आबादी 23.68 लाख है, लेकिन यहां 3.03 लाख परिवार राशन ले रहे हैं. यानी करीब 13.50 लाख लोग योजना के दायरे में हैं. हर महीने लगभग 12 करोड़ रुपये का मुफ्त राशन सिर्फ राजधानी में वितरित हो रहा है. अधिकारियों का अनुमान है कि शहरी इलाकों में 50 प्रतिशत से ज्यादा लाभार्थी पात्रता मानकों पर खरे नहीं उतरते. आय, संपत्ति और अन्य सरकारी योजनाओं के लाभ का मिलान करने पर कई विसंगतियां सामने आई हैं. यही वजह है कि अब शहरी कार्डधारकों की दोबारा जांच की जा रही है.
पात्र दस्तावेज मांगे तो, 5 लाख परिवार गायब
जहा खाद्य विभाग के आयुक्त कर्मवीर शर्मा ने बताया कि मुफ्त राशन के लिए जैसे ही आधार, बैंक खाता, समग्र आईडी और मोबाइल सत्यापन अनिवार्य हुआ, 5 लाख परिवारों ने न तो दस्तावेज जमा किए और न ही नोटिस का जवाब दिया. विभाग इसे संदिग्ध दावों की स्वाभाविक स्क्रीनिंग मान रहा है. सूत्रों का कहना है कि कई मामलों में एक ही व्यक्ति के नाम से अलग-अलग स्थानों पर कार्ड, मृत व्यक्तियों के नाम सक्रिय सूची में और आय सीमा से अधिक होने के बावजूद लाभ लेने के मामले पकड़े गए हैं.
ताकि वास्तविक जरुरतमंदों तक पहुंचे राशन
कर्मवीर शर्मा के अनुसार स्मार्ट पीडीएस के तहत मध्य प्रदेश का डेटा केंद्र सरकार के सर्वर पर लिया गया है. हितग्राहियों की ई-केवाईसी और डिजिटल जांच की जा रही है. जहां भी अनियमितता मिलती है वहां नोटिस जारी किया जा रहा है और संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जा रहा है.” दरअसल, सरकार का दावा है कि सख्ती का मकसद गरीबों का हक छीनना नहीं, बल्कि वास्तविक जरूरतमंद तक राशन पहुंचाना है. यदि अपात्र नाम हटते हैं तो करोड़ों रुपए की बचत होगी और वितरण व्यवस्था ज्यादा पारदर्शी बनेगी.
