बांसुरी का ऑर्डर और ढाई लाख की चपत: रिटायर्ड शिक्षक साइबर जाल में फंसे
उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)
जिले के नौरोजाबाद में एक रिटायर्ड शिक्षक के साथ ऑनलाइन ठगी का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने एक बार फिर साइबर अपराधियों की चालाकी को उजागर कर दिया। संगीत के शौक में मंगाई गई बांसुरी उनके लिए भारी पड़ गई और कुछ ही मिनटों में खाते से ढाई लाख रुपये साफ हो गए।
पीड़ित राजाराम चौहान ने चेन्नई की एक कंपनी से चार बांसुरियां ऑनलाइन ऑर्डर की थीं। ऑर्डर के बाद उनके व्हाट्सएप पर एक रसीद और डीटीडीसी का ट्रैकिंग नंबर आया। शुरुआत में सब सामान्य लगा। कुछ दिनों बाद जब उन्होंने पार्सल की स्थिति जानने के लिए ट्रैकिंग लिंक खोला, तो उसमें एक मोबाइल नंबर दिखा। पार्सल की जानकारी लेने के लिए उन्होंने उस नंबर पर संपर्क किया।
फोन उठाने वाले व्यक्ति ने खुद को कूरियर से जुड़ा बताते हुए कहा कि पार्सल में मोबाइल नंबर गलत दर्ज है। उसे ठीक कराने के नाम पर उसने नया नंबर मांगा और भरोसा दिलाया कि सुधार कर दिया जाएगा। यहीं से ठगी की कहानी शुरू हुई।
बातों-बातों में आरोपी ने कहा कि नंबर अपडेट करने के लिए एक ऑनलाइन भुगतान करना होगा। उसने एक लिंक भेजा और उस पर कुछ अंक दर्ज करने को कहा। इसके बाद उसने बैंक खाता नंबर और एटीएम कार्ड की 16 अंकों की जानकारी मांगी। इतना ही नहीं, कार्ड के पीछे लिखा सीवीवी नंबर भी पूछ लिया। भरोसे में आए शिक्षक ने सारी जानकारी दे दी। आरोपी ने आश्वस्त किया कि अब पार्सल समय पर मिल जाएगा।
कुछ दिन बाद पार्सल सचमुच पोस्ट ऑफिस पहुंच गया और उन्होंने उसे प्राप्त भी कर लिया। उन्हें लगा कि सब कुछ ठीक है। लेकिन असली झटका तब लगा जब बैंक से फोन आया कि उनके खाते से ढाई लाख रुपये निकल चुके हैं और तुरंत एटीएम ब्लॉक कराया जाए। बैलेंस चेक करने पर रकम गायब थी।
घबराए परिवार ने तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। मामला थाना नौरोजाबाद और जिला साइबर सेल तक पहुंचा। जांच में सामने आया कि अनजान लिंक पर क्लिक करने और एटीएम की गोपनीय जानकारी साझा करने से ठगों को खाते तक पहुंच मिल गई।
नौरोजाबाद थाना प्रभारी बालेंद्र शर्मा ने बताया कि पीड़ित एक सेवानिवृत्त शिक्षक हैं। उन्होंने बांसुरी मंगाई थी और ट्रैकिंग के दौरान गलत लिंक पर चले गए। वहीं से ठगों ने उन्हें झांसे में लेकर बैंक और कार्ड की पूरी जानकारी हासिल कर ली। पुलिस ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि साइबर अपराधी बेहद योजनाबद्ध तरीके से काम करते हैं। वे असली कंपनियों और कूरियर सेवाओं के नाम का इस्तेमाल कर भरोसा जीतते हैं, फिर छोटी सी लापरवाही का फायदा उठाकर बड़ी रकम उड़ा लेते हैं।
थाना प्रभारी बालेंद्र शर्मा ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें। एटीएम नंबर, सीवीवी, ओटीपी या बैंक खाते की जानकारी किसी भी हालत में साझा न करें। कूरियर या बैंक कभी भी फोन पर ऐसी गोपनीय जानकारी नहीं मांगते।
एक साधारण ऑनलाइन खरीदारी ने रिटायर्ड शिक्षक की जिंदगी की जमा-पूंजी पर चोट कर दी। यह मामला चेतावनी है कि डिजिटल सुविधा के साथ सतर्कता भी उतनी ही जरूरी है।


