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नगर पालिका में टेंडर का खेल, सब-इंजीनियर पर 25 प्रतिशत कमीशन मांगने के आरोप

Tapas Gupta

By Tapas Gupta

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नगर पालिका में टेंडर का खेल, सब-इंजीनियर पर 25 प्रतिशत कमीशन मांगने के आरोप

उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)

उमरिया की सियासत और प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक नाम तेजी से चर्चा में है। नगर पालिका की सब-इंजीनियर मानसी गुप्ता पर स्ट्रीट लाइट स्थापना के मामले में कमीशन मांगने के गंभीर आरोप लगे हैं। मामला सिर्फ पैसों की मांग तक सीमित नहीं है, बल्कि टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आरोपों के मुताबिक ठेकेदार उपेंद्र गुप्ता, फर्म स्पेयर्स वर्ल्ड, को काम के एवज में 30 प्रतिशत कमीशन देने का दबाव बनाया गया। बताया जा रहा है कि बातचीत के बाद यह रेट 25 प्रतिशत पर तय किया गया। ठेकेदार का दावा है कि उन्हें साफ शब्दों में कहा गया कि बिना हिस्सेदारी के बिल पास नहीं होगा। यहां तक कि होली के दिन 4 मार्च 2025 को चेंबर में बुलाकर दबाव बनाने की बात भी सामने आई है।

मामला तब और उलझा जब दस्तावेजों की तारीखें सामने आईं। रिकॉर्ड के अनुसार 19 जनवरी 2024 को टेंडर प्रकाशित हुआ। लेकिन आरोप है कि 12 जुलाई 2024 को टेंडर खुलने से पहले ही कार्यादेश जारी कर दिया गया। 21 मई 2025 को 10 लाख 44 हजार 875 रुपये का भुगतान भी कर दिया गया। जबकि टेंडर खोलने की प्रक्रिया 29 सितंबर 2025 को पूरी दिखाई गई। अगर यह क्रम सही है तो सवाल उठता है कि बिना विधिवत टेंडर खोले भुगतान कैसे हो गया।

नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी किशन सिंह ठाकुर ने कहा है कि शिकायत उनके पास आई थी और उन्होंने संबंधित अधिकारी से पूछताछ में आरोपों से इनकार किया गया है। वहीं शहडोल के कार्यपालन यंत्री अरविंद कुमार शर्मा पर भी जांच को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ठेकेदार पक्ष का आरोप है कि दस्तावेजी विसंगतियों के बावजूद मामले को हल्के में लिया गया।

सब-इंजीनियर मानसी गुप्ता से 8319254869 पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुआ। उनका पक्ष सामने नहीं आ सका है।

ठेकेदार का दावा है कि बिल भुगतान के लिए स्पष्ट शब्दों में 25 टका लाने की बात कही गई। साथ ही यह भी कहा गया कि हिस्सेदारी ऊपर तक जाती है। यदि यह सच है तो यह सिर्फ एक अधिकारी का मामला नहीं, बल्कि पूरी प्रशासनिक श्रृंखला पर सवाल है।

अब यह प्रकरण लोकायुक्त तक पहुंच चुका है। बताया जा रहा है कि ऑडियो रिकॉर्डिंग और अन्य दस्तावेज जांच एजेंसियों को सौंपे गए हैं। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और जिम्मेदारी किस पर तय होती है।

फिलहाल उमरिया की जनता यह देख रही है कि उनके टैक्स के पैसों से जुड़े विकास कार्यों में पारदर्शिता है या नहीं। जांच निष्पक्ष हुई तो कई परतें खुल सकती हैं। अगर आरोप निराधार साबित होते हैं, तो यह भी सामने आना चाहिए। लेकिन जब तक सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर उठे संदेह शांत होने वाले नहीं हैं।

Tapas Gupta

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मै तपस गुप्ता 9 सालों से लगातार पत्रकारिता मे सक्रिय हूं, समय पर और सटीक जानकारी उपलब्ध कराना ही मेरी पहली प्राथमिकता है। मो-7999276090

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