नल नहीं, जल नहीं… फिर भी करोड़ों का खेल! कुसमी में कागज़ों पर बहता ‘जल जीवन मिशन’, हकीकत में बूंद-बूंद को तरसे ग्रामीण”
सीधी जिले के कुसमी आदिवासी अंचल में जल जीवन मिशन की जमीनी हकीकत चौंकाने वाली तस्वीर पेश कर रही है। यहां करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद न तो घर-घर नल पहुंचे हैं और न ही पानी की एक बूंद। अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से कागज़ों में योजनाएं पूरी दिखाकर लाखों रुपये का बंदरबांट किया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार जनपद कुसमी के ग्राम पंचायत रौहाल, जूरी, मेडरा, भगवार, भुइमाड़, गुड़ुआधर, रामपुर, ठड़ीपाथर, गोतरा, भदौरा और टमसार सहित कई गांवों में पानी की टंकियां तो बनाई गईं, लेकिन वे सिर्फ दिखावा बनकर रह गई हैं। न पाइपलाइन सही ढंग से बिछी, न जलापूर्ति शुरू हो सकी। इसके बावजूद हर साल मेंटेनेंस के नाम पर सरकारी राशि निकालकर फर्जी बिल वाउचर लगाए जा रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले पांच वर्षों से यह खेल लगातार चल रहा है। भीषण गर्मी में हालात इतने खराब हैं कि लोग नदी-नालों से पानी लाने को मजबूर हैं। जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी समस्या के समाधान के बजाय कागजी आंकड़ों में उलझे हुए हैं।
समाजसेवी आनंद सिंह ददुआ ने आरोप लगाया कि बिना योजना और तैयारी के कार्य किए गए, जिसके कारण आज भी लोगों को पानी नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही कार्रवाई नहीं हुई तो वे धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
वहीं अब ग्राम निवासी बाबूलाल रावत ने इस पूरे मामले की शिकायत एसडीएम कुसमी शैलेश द्विवेदी से की है। इस पर एसडीएम ने कहा कि शिकायत मिली है, संबंधित अधिकारियों से बात कर जांच कराई जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी। साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि ग्रामीणों तक पानी पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता है।

