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मेहनत मजदूरों की… पैसा किसकी तिजोरी में,संजय गांधी ताप विद्युत गृह में एरियर्स पर उठे सवाल

Tapas Gupta

By Tapas Gupta

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मेहनत मजदूरों की… पैसा किसकी तिजोरी में,संजय गांधी ताप विद्युत गृह में एरियर्स पर उठे सवाल

तपस गुप्ता (7999276090)

जिले के संजय गांधी ताप विद्युत गृह (एसजीटीपीएस) में वर्षों तक पसीना बहाने वाले  ठेका मजदूर आज अपने ही हक की कमाई के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। मजदूरों का आरोप है कि उनकी मेहनत की कमाई का एरियर्स आज तक नहीं मिला, जबकि संबंधित ठेका कंपनी आका लॉजिस्टिक्स का कार्यकाल भी समाप्त हो चुका है। अब इस पूरे मामले ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।

स्थानीय निवासी हिमांशु द्विवेदी ने जिला कलेक्टर को शिकायत सौंपकर आरोप लगाया है कि हाई कोर्ट का रास्ता साफ होने के बावजूद मजदूरों का बकाया भुगतान नहीं किया गया। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और तत्काल भुगतान की मांग की है।

हाई कोर्ट ने रास्ता साफ किया, फिर भी क्यों अटका भुगतान

शिकायत के अनुसार अप्रैल 2024 में मध्य प्रदेश शासन ने न्यूनतम मजदूरी में लगभग 73 रुपये प्रतिदिन की वृद्धि लागू की थी। इस आदेश को कुछ नियोक्ताओं ने न्यायालय में चुनौती दी, जिससे भुगतान पर रोक लग गई। बाद में फरवरी 2025 में इंदौर खंडपीठ ने स्थगन आदेश समाप्त कर दिया। इसके बाद बढ़ी हुई मजदूरी और एरियर्स के भुगतान में कोई कानूनी बाधा नहीं बची। इसके बावजूद शिकायतकर्ता का आरोप है कि संजय गांधी ताप विद्युत गृह में कार्यरत रहे अनेक श्रमिकों को अब तक उनका बकाया नहीं मिला।

मजदूर पूछ रहे हैं, आखिर हमारा पैसा गया कहां

शिकायत में कहा गया है कि ठेका कंपनी का अनुबंध समाप्त होने के बाद भी मजदूरों का एरियर्स लंबित है। कई परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं और उन्हें अपनी मेहनत की कमाई के लिए लगातार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि जिन मजदूरों ने वर्षों तक संयंत्र के संचालन में अपनी सेवाएं दीं, आज वही अपने अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इससे श्रमिकों में गहरा असंतोष है।

प्रबंधन की जिम्मेदारी पर भी उठे सवाल

शिकायत में संविदा श्रम (विनियमन एवं उन्मूलन) अधिनियम और अन्य श्रम कानूनों का हवाला देते हुए कहा गया है कि यदि ठेका कंपनी भुगतान नहीं करती है तो मुख्य नियोक्ता की भी जिम्मेदारी बनती है कि मजदूरों को उनका वैधानिक भुगतान दिलाया जाए।

इसी आधार पर संजय गांधी ताप विद्युत गृह प्रबंधन की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि यह स्पष्ट किया जाए कि न्यायालय का आदेश आने के बाद भी भुगतान में इतनी देरी क्यों हुई।

कलेक्टर से दो टूक मांग

कलेक्टर को दिए गए आवेदन में मांग की गई है कि आका लॉजिस्टिक्स और संजय गांधी ताप विद्युत गृह प्रबंधन को निर्देश देकर सभी पात्र श्रमिकों का बकाया एरियर्स तत्काल एकमुश्त दिलाया जाए। साथ ही श्रम विभाग से पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित पक्षों की जवाबदेही तय की जाए।

शिकायतकर्ता का कहना है कि मजदूर किसी तरह की राहत नहीं, बल्कि अपनी मेहनत का वैधानिक अधिकार मांग रहे हैं। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो प्रभावित श्रमिक आगे बड़ा आंदोलन करने पर भी विचार कर सकते हैं।

अब सबकी नजर प्रशासन की कार्रवाई पर

यह मामला अब केवल बकाया भुगतान का नहीं, बल्कि श्रमिकों के अधिकारों और श्रम कानूनों के पालन का भी बन गया है। सवाल यह है कि आखिर सैकड़ों मजदूरों की मेहनत की कमाई कब मिलेगी और यदि भुगतान में लापरवाही हुई है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी।

वही जब इस संबंध में संजय गांधी का विद्युत केंद्र के मुख्य अभियंता एच के त्रिपाठी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मुझे नहीं जानकारी नहीं है।

 

 

Tapas Gupta

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मै तपस गुप्ता 9 सालों से लगातार पत्रकारिता मे सक्रिय हूं, समय पर और सटीक जानकारी उपलब्ध कराना ही मेरी पहली प्राथमिकता है। मो-7999276090

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