सरकार के दावों की खुली पोल, प्रसूता को एंबुलेंस नहीं, पिकअप से अस्पताल पहुंचाने की मजबूरी

उमरिया के जिला अस्पताल पहुंचने की उम्मीद में एक परिवार एंबुलेंस का इंतजार करता रहा, लेकिन जब सरकारी वाहन नहीं पहुंचा तो आखिरकार पिकअप वाहन ही सहारा बना। उमरिया जिले के बरतराई गांव से सामने आया यह मामला प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था और ग्रामीण क्षेत्रों में आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

बताया जा रहा है कि बरतराई गांव की एक प्रसूता को जिला अस्पताल ले जाने की जरूरत थी। परिजनों ने एंबुलेंस के लिए संपर्क किया और करीब एक घंटे तक इंतजार किया। इस दौरान उन्हें बताया गया कि मानपुर से एंबुलेंस आने के बाद ही उसे गांव भेजा जाएगा। प्रसूता की स्थिति को देखते हुए परिजनों ने और इंतजार करना उचित नहीं समझा और पिकअप वाहन की व्यवस्था कर उसे अस्पताल रवाना किया।


बरतराई से जिला अस्पताल की दूरी करीब 15 किलोमीटर है। जिस समय परिवार को सरकारी एंबुलेंस का सहारा मिलना चाहिए था, उस समय निजी स्तर पर वाहन की व्यवस्था करना पड़ा। यह स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।

अस्पताल की दहलीज पर भी व्यवस्था बेदम

परेशानी का सिलसिला जिला अस्पताल पहुंचने के बाद भी खत्म नहीं हुआ। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में अस्पताल के गेट पर कर्मचारी के मौजूद नहीं होने की स्थिति दिखाई दे रही है। इसके बाद परिजनों को खुद प्रसूता को पिकअप से उतारना पड़ा और स्टेचर की मदद से अस्पताल के भीतर ले जाना पड़ा।

इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो कांग्रेस नेत्री एवं जनपद सदस्य रोशनी सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है। वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, वायरल वीडियो की NewsE7 Live स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता।

सवालों के घेरे में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था

प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के दावे करती है, लेकिन सवाल यह है कि जब प्रसूता को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस की जरूरत पड़ी, तब वह समय पर उपलब्ध क्यों नहीं हुई।

क्या जिले में पर्याप्त एंबुलेंस नहीं हैं।यदि सभी एंबुलेंस व्यस्त थीं तो आपात स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था क्या है। और अस्पताल के प्रवेश द्वार पर मरीजों की मदद के लिए कर्मचारी मौजूद नहीं था तो इसकी निगरानी कौन करता है।

मामले में सिविल सर्जन डॉ. केसी सोनी ने बताया कि वर्तमान में रेफर के मामले अधिक होने से एंबुलेंस की कुछ परेशानी सामने आ रही है। उन्होंने कहा कि प्रसूता और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। गेट पर कर्मचारी नहीं मिलने के मामले में संबंधित कर्मचारी को नोटिस देने और जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं।

 

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