आखिर क्यों नहीं थम रहा बाघों की मौत का सिलसिला, बांधवगढ़ में एक और बाघिन की गई जान
उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)
जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों की लगातार हो रही मौतों ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। ताजा मामला एक 5 वर्षीय बाघिन की मौत का है, जिसने इलाज और रेस्क्यू के बावजूद दम तोड़ दिया। सवाल अब यही उठ रहा है कि आखिर इस तरह की घटनाएं क्यों नहीं थम रही हैं।
जानकारी के मुताबिक 15 मार्च 2026 की शाम मानपुर बफर क्षेत्र के बनवेई नाला, बीट दमना के पीएफ 352 के पास एक बाघिन के बीमार होने की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने हाथियों की मदद से निरीक्षण किया, जिसमें बाघिन बेहद कमजोर हालत में मिली और ज्यादा दूरी तक चलने में भी असमर्थ थी।
स्थिति को गंभीर देखते हुए तत्काल इलाज शुरू किया गया। 16 मार्च को बाघिन का रेस्क्यू कर उसे बहेरहा इनक्लोजर में शिफ्ट किया गया, जहां विशेषज्ञों की निगरानी में उसका इलाज जारी रहा। इसके बावजूद 17 मार्च की दोपहर उसकी मौत हो गई।
घटना की सूचना तुरंत नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) को दी गई। इसके बाद तय प्रक्रिया के अनुसार अधिकारियों की मौजूदगी में पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार किया गया।
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि बाघिन किसी गंभीर बीमारी से जूझ रही थी, जिसमें लिवर और तिल्ली प्रभावित थे, साथ ही आंतरिक रक्तस्राव भी पाया गया। हालांकि उसके सभी अंग सुरक्षित मिले हैं, जिससे शिकार की आशंका नहीं जताई जा रही है।
लेकिन लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं कई सवाल खड़े कर रही हैं। क्या जंगल में बाघों की स्वास्थ्य निगरानी पर्याप्त नहीं है? क्या बीमारियों का समय रहते पता नहीं चल पा रहा? या फिर जंगल के बदलते पर्यावरण और संसाधनों की कमी इसका कारण बन रही है?
फिलहाल सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं और विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार है। लेकिन जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक बाघों की मौत का यह सिलसिला चिंता का विषय बना रहेगा।


