चार घंटे तक 108 का इंतजार, तब पहुंची एंबुलेंस,पाली की स्वास्थ्य व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)
जिले के बिरसिंहपुर पाली में स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। गंभीर हालत में रेफर की गई एक महिला मरीज को समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने से परिजनों को घंटों परेशान होना पड़ा। लगातार कॉल और गुहार के बावजूद 108 एंबुलेंस रात तक नहीं पहुंची। आरोप है कि स्थानीय समाजसेवियों के हस्तक्षेप और कलेक्टर राखी सहाय से शिकायत के बाद ही एंबुलेंस मौके पर पहुंच सकी।
जानकारी के अनुसार पाली जनपत के ग्राम बरहाई निवासी लक्ष्मी बाई बैगा, पति अखिलेश बैगा, ने कुछ दिन पहले मेडिकल कॉलेज शहडोल में जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। दुर्भाग्यवश दोनों नवजातों की कुछ दिनों बाद मृत्यु हो गई। इलाज के बाद महिला को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, लेकिन घर पहुंचने के बाद उसकी तबीयत लगातार बिगड़ने लगी। आशा कार्यकर्ता ने स्थिति गंभीर देखते हुए उसे तत्काल बिरसिंहपुर पाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया।
अस्पताल में जांच के दौरान महिला का हीमोग्लोबिन काफी कम पाया गया। चिकित्सकों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए शुक्रवार शाम करीब 6:39 बजे उसे बेहतर उपचार के लिए शहडोल रेफर कर दिया। इसके बाद परिजनों ने 108 एंबुलेंस सेवा पर लगातार संपर्क किया, लेकिन हर बार यही जवाब मिला कि वाहन रास्ते में है और जल्द पहुंच जाएगा।
परिजनों का आरोप है कि रात करीब 10 बजे तक एंबुलेंस नहीं पहुंची। इस दौरान मरीज की हालत लगातार बिगड़ती रही और परिवार के लोग असहाय होकर अस्पताल परिसर में मदद का इंतजार करते रहे। बाद में स्थानीय समाजसेवियों ने मामले में हस्तक्षेप किया और कलेक्टर उमरिया राखी सहाय से संपर्क कर पूरी स्थिति से अवगत कराया। इसके बाद रात लगभग 10:30 बजे एंबुलेंस अस्पताल पहुंची और महिला को शहडोल रवाना किया जा सका।
यह घटना केवल एक मरीज की परेशानी तक सीमित नहीं है, बल्कि पाली की स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर भी सामने लाती है। करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र होने के बावजूद अस्पताल परिसर में तत्काल उपलब्ध एंबुलेंस नहीं होना गंभीर चिंता का विषय माना जा रहा है। आपातकालीन स्थिति में मरीजों को 108 सेवा के भरोसे रहना पड़ता है और यदि वह भी समय पर नहीं पहुंचे तो मरीजों की जान जोखिम में पड़ जाती है।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि आदिवासी बहुल इलाके में गंभीर मरीजों के लिए अस्पताल में कम से कम एक स्थायी एंबुलेंस की व्यवस्था की जानी चाहिए। उनका मानना है कि स्वास्थ्य सेवाओं का उद्देश्य केवल भवन और सुविधाओं का निर्माण नहीं, बल्कि जरूरतमंद मरीज तक समय पर उपचार और सुरक्षित परिवहन उपलब्ध कराना भी है।
अब इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली, 108 एंबुलेंस सेवा की उपलब्धता और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि मामले की जांच कर जिम्मेदारों की जवाबदेही तय की जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य मरीज को ऐसी पीड़ा का सामना न करना पड़े।


