जनसुनवाई में फीकी रही मौजूदगी, प्रस्तावित कोयला खदान परियोजना पर उठे पारदर्शिता के सवाल
उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)
जिले के पाली तहसील के ग्राम पंचायत भिम्माडोंगरी में प्रस्तावित वेस्ट ऑफ शहडोल (साउथ) कोल माइंस परियोजना को लेकर आयोजित पर्यावरणीय जनसुनवाई कई सवालों के बीच संपन्न हुई। जेके सीमेंट से संबंधित बताई जा रही इस परियोजना के लिए प्रशासन ने पहले से लगभग 500 लोगों की उपस्थिति का अनुमान लगाते हुए व्यापक सुरक्षा और व्यवस्थाएं की थीं, लेकिन जनसुनवाई के दौरान स्थानीय लोगों के अनुसार अपेक्षा से काफी कम ग्रामीण पहुंचे। कार्यक्रम स्थल पर बड़ी संख्या में खाली कुर्सियां दिखाई देने से पूरे आयोजन की प्रक्रिया चर्चा का विषय बन गई।

500 लोगों की तैयारी, उपस्थिति रही बेहद कम
जनसुनवाई के मद्देनजर प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया था। क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी अशोक तिवारी और एडीएम प्रमोद सेन गुप्ता की मौजूदगी में पूरी प्रक्रिया संपन्न कराई गई। हालांकि स्थानीय ग्रामीणों का दावा है कि कार्यक्रम में 100 से भी कम लोग शामिल हुए। जबकि परियोजना से लगभग नौ गांव प्रभावित होने की बात कही जा रही है। ऐसे में प्रभावित क्षेत्रों के लोगों की कम भागीदारी को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

सूचना के प्रचार-प्रसार पर ग्रामीणों ने जताई नाराजगी
ग्रामीणों का आरोप है कि जनसुनवाई की सूचना प्रभावित गांवों तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंचाई गई। उनका कहना है कि कंपनी की ओर से पर्याप्त प्रचार-प्रसार नहीं किया गया, जिसके कारण बड़ी संख्या में ग्रामीणों को समय रहते जानकारी ही नहीं मिल सकी। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रत्येक गांव तक सूचना पहुंचती, तो अधिक लोग अपनी आपत्तियां और सुझाव दर्ज कराने जनसुनवाई में शामिल होते।
कर्मचारियों की मौजूदगी को लेकर भी उठी चर्चा
जनसुनवाई के दौरान मौजूद कुछ लोगों का दावा है कि स्थानीय ग्रामीणों की अपेक्षा कंपनी से जुड़े कर्मचारियों की संख्या अधिक दिखाई दी। कई लोगों ने इसे लेकर सवाल भी उठाए। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन आयोजन के दौरान यह मुद्दा चर्चा का विषय बना रहा।
पर्यावरण और आजीविका को लेकर जताई चिंता
ग्रामीणों ने आशंका जताई कि प्रस्तावित कोयला खदान से क्षेत्र के जंगल, जल स्रोत, कृषि भूमि और स्थानीय लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। उनका कहना है कि पर्यावरणीय जनसुनवाई का उद्देश्य प्रभावित लोगों की राय जानना होता है, इसलिए आवश्यक था कि अधिक से अधिक ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित की जाती। उनका मानना है कि यदि सूचना के अभाव में प्रभावित लोग ही शामिल नहीं हो पाए, तो जनसुनवाई की प्रक्रिया की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
कंपनी का पक्ष नहीं मिल सका
इस संबंध में कंपनी का पक्ष जानने के लिए जेके सीमेंट के मैनेजर विकास द्विवेदी से मोबाइल फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। इसके कारण कंपनी की आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी। यदि भविष्य में कंपनी की ओर से कोई स्पष्टीकरण या पक्ष सामने आता है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
जनभागीदारी को लेकर उठे कई सवाल
जनसुनवाई समाप्त होने के बाद क्षेत्र में चर्चा का विषय यह रहा कि जब प्रशासन ने लगभग 500 लोगों के आने की संभावना जताई थी, तो वास्तविक उपस्थिति इतनी कम क्यों रही। क्या प्रभावित गांवों तक सूचना समय पर पहुंची थी? क्या सभी प्रभावित लोगों को अपनी बात रखने का समान अवसर मिला,इन सवालों के जवाब फिलहाल स्पष्ट नहीं हैं।


