विधायक निधि की एम्बुलेंस चार साल भी नहीं चली, अब नीलामी की तैयारी… उमरिया के स्वास्थ्य विभाग पर उठे सवाल
जनता के पैसों से खरीदी गई एम्बुलेंस कंडम घोषित, जिले में पहले भी हो चुकी है शासकीय वाहनों की नीलामी
उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)
जिले का स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर सवालों के घेरे में है। विधायक विकास निधि वर्ष 2021-22 से मरीजों की सुविधा के लिए दी गई पेशेंट ट्रांसपोर्ट एम्बुलेंस अब सड़कों पर सेवा देने के बजाय नीलामी की कतार में खड़ी दिखाई दे रही है। हैरानी की बात यह है कि जिस एम्बुलेंस को लोगों की आपातकालीन मदद के लिए खरीदा गया था वह चार साल भी ठीक से नहीं चल पाई और अब उसे कंडम घोषित कर नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
जानकारी के अनुसार मानपुर और बांधवगढ़ विधानसभा क्षेत्रों को मिलाकर कुल चार एम्बुलेंस उपलब्ध कराई गई थीं। इन एम्बुलेंस का उद्देश्य दूरदराज के गांवों में मरीजों को समय पर अस्पताल तक पहुंचाना था। लेकिन कुछ ही समय बाद इन वाहनों के पहिए थम गए और अब हालात ऐसे हैं कि इन्हें नीलाम करने की तैयारी चल रही है।

इस पूरे मामले में जनसंपर्क विभाग की ओर से स्पष्टीकरण भी जारी किया गया है। मुख्य खंड चिकित्सा अधिकारी पाली डॉ. पी.एल. सागर ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग में इमरजेंसी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए राज्य स्तर से निजी एजेंसियों को वाहन सौंपे जाते हैं। यदि कोई वाहन इमरजेंसी सेवा के लिए उपयुक्त नहीं रहता, तो उसे कंडम घोषित कर डिस्पोज किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि जिले में पहले भी कंडम वाहनों की नीलामी की प्रक्रिया की जा चुकी है।
बताया गया कि 108 इमरजेंसी सेवाओं का संचालन जय अंबे सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया जाता है। आवश्यक दस्तावेज और प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद इन एम्बुलेंस को भी कंडम घोषित कर नीलामी के लिए प्रक्रिया में लिया गया है।
हालांकि इस पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आम तौर पर निजी वाहन वर्षों तक सड़कों पर दौड़ते रहते हैं, लेकिन शासकीय विभागों में अक्सर वाहन कुछ ही सालों में बदहाल हो जाते हैं। आखिर ऐसा क्या हुआ कि जनता के पैसे से खरीदी गई एम्बुलेंस कुछ ही समय में कबाड़ बन गई?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि वाहनों का सही रखरखाव किया जाता तो वे लंबे समय तक सेवा दे सकते थे। ऐसे में यह मामला केवल एक वाहन की नीलामी का नहीं, बल्कि सरकारी संसाधनों के उपयोग और निगरानी पर भी सवाल खड़ा करता है।
अब देखना यह होगा कि जिम्मेदारी किस पर तय होती है। क्योंकि जिस एम्बुलेंस को लोगों की जिंदगी बचाने के लिए सड़क पर दौड़ना था, वह आज नीलामी की सूची में पहुंच गई है। और यही बात उमरिया जिले में सरकारी व्यवस्था की कार्यशैली पर चर्चा का विषय बन गई है।


