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Mp news:’कटे सिर वाली’ विष्णु मूर्ति बहाल करने से इनकार, कहा – “भगवान से ही प्रार्थना कीजिए”

Manoj Shukla

By Manoj Shukla

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Mp news : सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: खजुराहो जावरी मंदिर में ‘कटे सिर वाली’ विष्णु मूर्ति बहाल करने से इनकार, कहा – “भगवान से ही प्रार्थना कीजिए”

नई दिल्ली/खजुराहो, 16 सितंबर 2025।

Mp news : भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने आज एक ऐतिहासिक आदेश में मध्यप्रदेश के खजुराहो स्थित जावरी मंदिर में भगवान विष्णु की कटे सिर वाली सात फीट ऊंची मूर्ति को पुनर्स्थापित करने की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यह विषय धार्मिक आस्था से अधिक पुरातात्विक संरक्षण का है और इस पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की प्रक्रियाएं ही लागू होंगी।

मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की पीठ ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की भावनाओं को समझते हुए भी टिप्पणी की –

“आप कहते हैं कि आप भगवान विष्णु के परम भक्त हैं, तो जाइए और अपने भगवान से ही प्रार्थना कीजिए। यह एक संरक्षित पुरातात्विक धरोहर है, इसमें हम हस्तक्षेप नहीं कर सकते।”

✦ याचिका का तर्क और कोर्ट की प्रतिक्रिया

Mp news : याचिकाकर्ता, मध्यप्रदेश के एक श्रद्धालु, ने तर्क दिया कि मूर्ति मुगल आक्रमणों के दौरान विकृत की गई और आज भी उसी अवस्था में है।

उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) का हवाला देते हुए कहा कि सिरविहीन मूर्ति श्रद्धालुओं के मूल पूजा-अधिकार का हनन है।

कोर्ट ने कहा कि धार्मिक भावनाओं और ऐतिहासिक धरोहरों के बीच संतुलन जरूरी है, और इस विषय में केवल ASI ही वैधानिक रूप से निर्णय ले सकती है।

✦ मंदिर और मूर्ति की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

जावरी मंदिर खजुराहो के पूर्वी समूह का हिस्सा है, जिसका निर्माण चंदेल राजवंश (10वीं–11वीं शताब्दी) में हुआ।

गर्भगृह में भगवान विष्णु की चार भुजाओं वाली मूर्ति आज भी स्थापित है, लेकिन सिर धड़ से अलग है।

इतिहासकार मानते हैं कि मूर्ति को 16वीं–17वीं शताब्दी में मुगल कालीन हमलों के दौरान क्षति पहुंची।

यह मंदिर अब युनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट का हिस्सा है और ASI के संरक्षण में है।

✦ कोर्ट की टिप्पणियों का व्यापक संदर्भ

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले भी Places of Worship Act 1991 से जुड़े मामलों में स्पष्ट किया है कि ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों की स्थिति में बदलाव नहीं किया जा सकता।

हाल ही में कोर्ट ने कहा था – “ईश्वर को न्याय में देखिए, न कि मुकदमों में।”

जावरी मंदिर मामले में भी कोर्ट ने उसी सिद्धांत को दोहराया कि धार्मिक आस्था का सम्मान है, लेकिन विधिक और पुरातात्विक प्रक्रियाएं सर्वोपरि हैं।

✦ व्यापक बहस और सांस्कृतिक महत्व

यह फैसला उन बहसों से भी जुड़ा है जहां धार्मिक भावनाएं और संरक्षित विरासत टकराती हैं।

खजुराहो के अन्य मंदिरों, जैसे कंदारिया महादेव और लक्ष्मण मंदिर, में समय-समय पर ASI द्वारा संरक्षण कार्य किए जाते हैं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह निर्णय भविष्य के उन विवादों के लिए भी मिसाल बनेगा, जहां ऐतिहासिक स्मारक बनाम धार्मिक पुनर्स्थापना का प्रश्न उठता है।

Manoj Shukla

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मै मनोज कुमार शुक्ला 9 सालों से लगातार पत्रकारिता मे सक्रिय हूं, समय पर और सटीक जानकारी उपलब्ध कराना ही मेरी पहली प्राथमिकता है।

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