अधिकारी बदले, प्रभारी बदले… पर नहीं बदली अवैध शराब की धंधेबाजी
उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)
जिले के बिरसिंहपुर पाली, जिसे धार्मिक नगरी के रूप में जाना जाता है, वहां इन दिनों एक अलग ही तस्वीर देखने को मिल रही है। एक ओर आस्था और श्रद्धा का माहौल, तो दूसरी ओर खुलेआम चल रही अवैध शराब की बिक्री प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। हैरानी की बात यह है कि समय-समय पर अधिकारी और प्रभारी बदलते रहे, लेकिन अवैध शराब का कारोबार जस का तस बना हुआ है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, क्षेत्र के कई होटल और ढाबों में दिनदहाड़े शराब की पैकारी और बिक्री हो रही है। यह कोई छुपा हुआ खेल नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क के तहत संचालित किया जा रहा धंधा है। सवाल उठता है कि जब यह सब खुलेआम हो रहा है, तो जिम्मेदार विभाग आखिर आंखें क्यों मूंदे हुए है?
आबकारी विभाग की भूमिका यहां सबसे ज्यादा संदेह के घेरे में है। आरोप है कि विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा नेटवर्क चल पाना संभव नहीं। ठेकेदारों और शराब माफिया के बीच गहरे तालमेल की चर्चाएं भी आम हैं। यही वजह है कि कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत नहीं बदलती।
स्थानीय पुलिस की स्थिति भी कुछ अलग नहीं दिखती। लोगों का कहना है कि पुलिस को इस पूरे मामले की पूरी जानकारी है, लेकिन कार्रवाई न के बराबर है। कभी-कभार दिखावे के लिए छोटी-मोटी कार्रवाई जरूर होती है, लेकिन बड़े खिलाड़ियों तक कोई नहीं पहुंचता।
दिन के उजाले में हो रही शराब पैकारी इस बात का साफ संकेत है कि अवैध कारोबारियों के हौसले कितने बुलंद हैं। उन्हें न कानून का डर है और न ही प्रशासन का। धार्मिक स्थल की छवि को धूमिल करने वाला यह कारोबार लगातार फैलता जा रहा है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस अवैध धंधे का असर युवाओं और समाज के कमजोर वर्ग पर पड़ रहा है। सस्ती और आसानी से उपलब्ध शराब लोगों को नशे की ओर धकेल रही है, जिससे सामाजिक समस्याएं भी बढ़ रही हैं।


