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ओटीपी के चक्कर में अटकी खून जांच, उमरिया जिला अस्पताल में मरीजों की बढ़ी परेशानी

Tapas Gupta

By Tapas Gupta

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ओटीपी के चक्कर में अटकी खून जांच, उमरिया जिला अस्पताल में मरीजों की बढ़ी परेशानी

उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)

उमरिया जिला चिकित्सालय में इन दिनों खून जांच कराने आए मरीजों को एक नई परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जांच से पहले ओटीपी की अनिवार्यता के कारण कई मरीजों को बिना जांच कराए ही वापस लौटना पड़ रहा है। खासकर उन लोगों को अधिक दिक्कत हो रही है जिनके आधार कार्ड में मोबाइल नंबर लिंक नहीं है या फिर पुराना नंबर दर्ज है।

जिला अस्पताल में रोजाना जिले के दूर-दराज गांवों से सैकड़ों मरीज जांच और इलाज के लिए पहुंचते हैं। लेकिन ओटीपी आधारित प्रक्रिया के कारण कई मरीज घंटों लाइन में लगने के बाद भी जांच नहीं करा पा रहे हैं। अस्पताल में खून जांच के लिए अब आभा आईडी से पंजीकरण किया जा रहा है, जिसके लिए आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर ओटीपी आना जरूरी है।

मरीज विमलेश गुप्ता ने बताया कि वह खून जांच कराने जिला अस्पताल पहुंची थीं, लेकिन आधार कार्ड में दूसरा मोबाइल नंबर लिंक होने के कारण ओटीपी उसी नंबर पर चला गया, जो उनके पास नहीं था। उन्होंने बताया कि अस्पताल में उन्हें यह कहकर लौटा दिया गया कि जब तक आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर ओटीपी नहीं आएगा, तब तक जांच नहीं हो सकती। इसके बाद उन्हें पहले आधार में मोबाइल नंबर अपडेट कराने की सलाह दी गई।

इस समस्या के कारण कई मरीजों को बार-बार अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीजों के लिए यह परेशानी और भी बढ़ जाती है, क्योंकि कई लोगों के आधार कार्ड में पुराना मोबाइल नंबर दर्ज है या फिर नंबर बंद हो चुका है।

वहीं इस मामले में जब मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी वीएस चंदेल से बात की गई तो उन्होंने बताया कि खून जांच सहित कई स्वास्थ्य सेवाओं में अब आभा आईडी के माध्यम से डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। इसके लिए आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर ओटीपी के जरिए पंजीकरण किया जाता है, जिससे मरीज का पूरा स्वास्थ्य रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है।

उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि यदि कोई व्यक्ति वर्षों बाद भी इलाज कराने आए तो उसकी पिछली जांच और स्वास्थ्य से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड आसानी से मिल सके। साथ ही जिले में बीमारियों की स्थिति का भी बेहतर आंकलन किया जा सकेगा।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी मरीज के मोबाइल में ओटीपी नहीं आता है तो अस्पताल में उसकी जांच की व्यवस्था भी की जाती है। बावजूद इसके, अस्पताल आने वाले कई मरीजों को इस नई प्रक्रिया के कारण परेशानी झेलनी पड़ रही है।

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मै तपस गुप्ता 9 सालों से लगातार पत्रकारिता मे सक्रिय हूं, समय पर और सटीक जानकारी उपलब्ध कराना ही मेरी पहली प्राथमिकता है। मो-7999276090

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