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QR कोड: सीधी बना भारत का पहला जिला, जहां हर थाने में साइन लैंग्वेज तकनीक से होगी सीधी सुनवाई

Manoj Shukla

By Manoj Shukla

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मूक-बधिरों को न्याय की आवाज़ देगा QR कोड: सीधी बना भारत का पहला जिला, जहां हर थाने में साइन लैंग्वेज तकनीक से होगी सीधी सुनवाई

मूक-बधिर नागरिकों को न्याय दिलाने की दिशा में सीधी जिले ने देशभर में एक ऐतिहासिक और मिसाल कायम करने वाला कदम उठाया है। सीधी अब भारत का पहला जिला बन गया है, जहां सभी थानों और चौकियों में साइन लैंग्वेज आधारित QR कोड सिस्टम लगाया जा रहा है। यह पूरी व्यवस्था बेंगलुरु स्थित साइन लैंग्वेज कंपनी द्वारा विकसित की गई है, जो देशभर में मूक-बधिरों के लिए संचार और अनुवाद के क्षेत्र में कार्य कर रही है।

यह बेंगलुरु की साइन लैंग्वेज कंपनी विशेष रूप से मूक-बधिर और श्रवण बाधित व्यक्तियों की साइन लैंग्वेज को सामान्य भाषा में बदलने का कार्य करती है। कंपनी ने एक अत्याधुनिक डिजिटल QR कोड सिस्टम और कॉल सेंटर मॉडल विकसित किया है, जिसके माध्यम से मूक-बधिर व्यक्ति बिना किसी दुभाषिये के सीधे अपनी बात प्रशासन तक पहुंचा सकता है।

जब कोई मूक-बधिर व्यक्ति सीधी जिले के किसी भी थाने में जाकर लगाए गए QR कोड को स्कैन करेगा, तो वह सीधे बेंगलुरु स्थित कंपनी के कॉल सेंटर से वीडियो कॉल के माध्यम से जुड़ जाएगा। कॉल सेंटर में मौजूद प्रशिक्षित वालंटियर उसकी साइन लैंग्वेज को तुरंत समझकर उसे सामान्य भाषा में कन्वर्ट करेंगे और संबंधित थाना प्रभारी या पुलिस स्टाफ को बताएंगे कि व्यक्ति क्या कहना चाहता है और वह किस प्रकार की शिकायत लेकर आया है।

इस तकनीक को मध्यप्रदेश में लागू करने के लिए कंपनी का मध्यप्रदेश शासन के साथ एमओयू (MoU) हुआ है। इसके तहत कंपनी न केवल तकनीकी सहयोग दे रही है, बल्कि कॉल सेंटर में प्रशिक्षित वालंटियर, सॉफ्टवेयर सपोर्ट और साइन लैंग्वेज अनुवाद की पूरी जिम्मेदारी भी निभा रही है।

इस अभिनव पहल को लेकर आनंद सर्विस सोसायटी मूक-बधिर संस्था, इंदौर के सचिव ज्ञानेंद्र पुरोहित के नेतृत्व में सीधी पुलिस अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में एसपी संतोष कोरी, एडिशनल एसपी अरविंद श्रीवास्तव, सभी एसडीओपी, थाना और चौकी प्रभारी शामिल रहे।

ज्ञानेंद्र पुरोहित ने बताया कि देश में पहली बार ऐसा हो रहा है जब पूरे जिले के सभी थानों में एक साथ मूक-बधिरों के लिए यह सुविधा लागू की जा रही है। इससे पहले योजनाएं बनीं, लेकिन जमीनी स्तर पर कभी अमल नहीं हुआ।

Manoj Shukla

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मै मनोज कुमार शुक्ला 9 सालों से लगातार पत्रकारिता मे सक्रिय हूं, समय पर और सटीक जानकारी उपलब्ध कराना ही मेरी पहली प्राथमिकता है।

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