Umaria News: मुख्यमंत्री कार्यक्रम में भीड़ जुटाने पंचायत फंड से भुगतान, पूर्व विधायक ने लगाया आरोप
उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)
उमरिया जिले के पाली विकास खंड के ग्राम पंचायत बड़वाही के विकास कार्यों के लिए आवंटित राशि के दुरुपयोग का एक मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीते दिनों पेसा एक्ट के तहत ग्राम पंचायत गोरईया में आयोजित मुख्यमंत्री महासम्मेलन में भाग लेने के लिए ग्रामीणों को ले जाने हेतु पंचायत से ऑटो किराया के नाम पर 16,000 रुपये का भुगतान किया गया। इस भुगतान को लेकर अब राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है।
पूर्व विधायक और जिला कांग्रेस कमेटी उमरिया के अध्यक्ष अजय सिंह ने इस पूरे प्रकरण को लेकर पंचायत और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत गोरईया में आयोजित मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बड़वाही पंचायत से ग्रामीणों को ले जाने हेतु जिन आठ ऑटो का भुगतान किया गया, वह वास्तविक दूरी और दर से कहीं अधिक है। अजय सिंह ने कहा बड़वाही से गोरईया की दूरी इतनी नहीं है कि एक ऑटो का 2000 रुपये भुगतान किया जाए। यह सीधा-सीधा फर्जीवाड़ा और पंचायत फंड का दुरुपयोग है।
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि यह भुगतान विकास कार्यों के फंड से किया गया, जिससे गांव के मूलभूत विकास कार्य प्रभावित होंगे। ग्रामवासियों के हक का पैसा दिखावे में खर्च कर ग्रामीणों को ठगा जा रहा है अजय सिंह ने कहा
इस मामले में जब ग्राम पंचायत के सचिव से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उनसे बातचीत नहीं हो सकी। वहीं दूसरी ओर, जब जनपद पंचायत पाली के सीईओ कुंवर कन्हाई से बात की गई, तो उन्होंने पुष्टि की कि पंचायत स्तर पर लोगों को एकत्र कर कार्यक्रम में भेजने के लिए मौखिक निर्देश जरूर दिए गए थे। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इसका कोई लिखित आदेश जारी नहीं किया गया था।
कुंवर कन्हाई ने कहा, मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी पंचायतों को दी गई थी, और उसी के तहत भुगतान पंचायतों के फंड से किया गया। यह मौखिक आदेश के तहत किया गया, जिसकी जानकारी संबंधित पंचायतों को थी।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि क्या पंचायतों में फंड के सही उपयोग की निगरानी हो रही है? क्या विकास कार्यों के नाम पर आई राशि का इस तरह के कार्यक्रम में उपयोग उचित है? पूर्व विधायक अजय सिंह ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग कि है।
इस बीच ग्रामीणों में भी इस खर्च को लेकर नाराजगी है। उनका कहना है कि यदि यही पैसा गांव में पेयजल, सड़क या अन्य मूलभूत सुविधाओं पर खर्च होता तो गांव को लाभ मिलता, न कि केवल एक ऐसे कार्यक्रम के लिए।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और ग्राम पंचायतों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
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