जनसुनवाई कार्यक्रम बना मजाक,परिणाम नहीं मिलने से आवेदक हो रहे निराश

जनसुनवाई कार्यक्रम बना मजाक,परिणाम नहीं मिलने से आवेदक हो रहे निराश

संजय सिंह मझौली

एक तरफ जहां आम लोगों की समस्या का सरल एवं त्वरित गति से समाधान के लिए खंड स्तर पर प्रत्येक सप्ताह मंगलवार को “जनसुनवाई” का कार्यक्रम आयोजित किया जाता है लेकिन तहसील क्षेत्र मझौली का जनसुनवाई कार्यक्रम मजाक बनकर रह गया है जिसके पीछे आवेदकों की माने तो दिए गए आवेदनों पर न तो समाधान मिलता है और ना ही जिम्मेदार लोग गंभीरता से लेते हैं। यही कारण है कि दिनों दिन आवेदनों की संख्या घटती जा रही है जिसका नजारा 11 अगस्त 2026 मंगलवार को जनसुनवाई कार्यक्रम में साफ देखने को मिला जहां चंद लोग जनसुनवाई में शामिल हुए।

समस्याओं से जूझ रहे हैं लोग

अगर यह मान भी लिया जाए कि लोगों की समस्या नहीं है इसलिए नहीं आते हैं तो यह कहना भी गलत होगा क्योंकि इसी जनसुनवाई कार्यक्रम में विगत 28 जुलाई मंगलवार को कलेक्टर शामिल हुए थे जिसकी जानकारी मिलने पर दो सैकड़ा से ज्यादा आवेदन पत्र दिए गए थे क्योंकि लोगों को भरोसा था कि कलेक्टर के जनसुनवाई में समस्या का निदान होगा।

नहीं रहते जिम्मेदार विभाग के अधिकारी

जनसुनवाई कार्यक्रम का मजाक होने का एक और कारण है क्योंकि तहसील क्षेत्र में कई विभाग कार्यरत हैं और प्रत्येक विभाग से समस्या हो सकती है जबकि मात्र कुछ विभाग के जिम्मेदार अथवा उनके अधीनस्थ कर्मचारी शामिल होते हैं ज्यादातर विभाग की उपस्थिति नगण्य रहती है जिससे अपेक्षित परिणाम भी नहीं आता है।

नहीं शामिल हुए उपखंड अधिकारी

अभी तक की जनसुनवाई कार्यक्रम में उपखंड अधिकारी अनिवार्य रूप से मौजूद रहते थे लेकिन आज 11 अगस्त की जनसुनवाई में उपखंड अधिकारी मौजूद नहीं रहे जिस कारण भी जनसुनवाई कार्यक्रम खानापूर्ति में सिमटता नजर आया।

जरूरत है आवेदनों की समीक्षा करने की

जन चर्चाओं की माने तो जरूरत इस बात की है कि अगर इस मंगलवार को प्राप्त हुए आवेदनों पर 7 दिन के अंदर समीक्षा कर आगे मंगलवार को उसका परिणाम आवेदक को मिले तब लोगों में भरोसा पैदा हो और जनसुनवाई की उपयोगिता भी धरातल पर दिखे।

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