लबालब पानी मे डूबा मिट्टी परीक्षण केंद्र मझौली,किसानों को नहीं मिली मिट्टी परीक्षण की सुविधा

लबालब पानी मे डूबा मिट्टी परीक्षण केंद्र मझौली,किसानों को नहीं मिली मिट्टी परीक्षण की सुविधा

संजय सिंह मझौली

               एक तरफ जहां आधुनिक तकनीक से खेती करने के लिए मिट्टी परीक्षण को अनिवार्य मानते हुए प्रदेश सरकार द्वारा खंड स्तर पर लाखों रुपए का बजट जारी कर मिट्टी परीक्षण केंद्र बनवाया गया है जिसमें कर्मचारी भी तैनात किए गए हैं लेकिन तहसील मुख्यालय मझौली में बने मिट्टी परीक्षण केंद्र में किसानों को मिट्टी परीक्षण की सुविधा तो कभी नहीं मिली बल्कि इन दिनों वह भवन लबालब पानी मे डूबा हुआ है जिस कारण लाखों रुपए के तकनीकी यंत्र खराब हो सकते हैं और भवन भी धराशाई हो सकता है।

नमूना देने पर भी नहीं मिलती जांच रिपोर्ट

            क्षेत्रीय किसानों की माने तो लगभग एक दशक से यह भवन बना है और लाखों रुपए के तकनीकी यंत्र भी विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए हैं लेकिन जब भी किसान मिट्टी परीक्षण के लिए नमूना लेकर जाते हैं तो उसे रख लिया जाता है लेकिन उसकी जांच रिपोर्ट किसानों को नहीं दी जाती है बल्कि कहा जाता है कि नमूना बाहर भेजा गया है रिपोर्ट आएगी तो बताया जाएगा।यही कारण है कि क्षेत्रीय किसान मिट्टी परीक्षण के अभाव में आधुनिक तकनीक से खेती करने में पूर्ण रूप से कामयाब नहीं हो रहा है।

भवन निर्माण पर भी बड़ा सवाल

        जानकारों के मुताबिक सबसे बड़ा सवाल तो मिट्टी परीक्षण के लिए बनाया गया भवन ही कई सवाल पैदा करता है क्योंकि जिस स्थान पर भवन निर्मित है वहां पर एक तरफ सड़क व पानी से लबालब भरा तालाब है दूसरी तरफ विद्यालय एवं दो तरफ किसानों के खेत हैं और बीच में 4 से 5 फीट गहराई युक्त स्थान था जिसे नियमानुसार पहले चारों तरफ के जमीन के लेवल में मिट्टी पटाव करना चाहिए फिर पिलर खड़े कर भवन का निर्माण करना चाहिए लेकिन ऐसा ना करके उसी स्थिति पर भवन का निर्माण कर दिया गया है जिस कारण बरसात के दिनों में उस भवन में पानी जमा हो जाता है जहां भवन के किवाड़ तक नहीं खुलते हैं।ऐसे में तत्कालीन निर्माण एजेंसी के लापरवाही का खामियाजा क्षेत्रीय किसानों को भुगतना पड़ रहा है।

नही उठा क़ृषि विस्तार अधिकारी का फोन

                      इस सम्बन्ध मे जानकारी के लिए मीडिया द्वारा जब प्रभारी कृषि विस्तार अधिकारी से सम्पर्क किया गया तो उनके द्वारा फोन रिसीव करना उचित नही समझा जो उनके निष्क्रिय कार्य शैली को दर्शाता है l

इनका कहना

            सिर्फ भवन बनाने एवं कर्मचारी तैनात कर देने से हम किसानों को मिट्टी परीक्षण का लाभ नहीं मिलेगा बल्कि केंद्र का नियमित और नियमानुसार संचालन सुनिश्चित किया जाना जरूरी है जिसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन एवं स्थानीय प्रशासन की है।

द्वारिका प्रसाद बैस जिला उपाध्यक्ष,राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ जिला सीधी

          मैं दो-तीन बार केंद्र में मिट्टी का नमूना जमा किया था लेकिन रिपोर्ट आज तक नहीं मिली जिससे मिट्टी परीक्षण का लाभ नहीं मिल रहा है। केंद्र का नियम के अनुसार संचालन किया जाना जरूरी है।

*राजभान सिंह किसान गंजरी*

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