जनपद बजाग के ceo पर गिरी गाज,अंत्येष्टि सहायता रोकने की लापरवाही में कमिश्नर ने किया निलंबित
डिंडोरी मे योजनाओं के संचालन में लापरवाही और जिम्मेदारी से मुंह मोड़ने वाले अफसरों पर अब सीधी कार्रवाई शुरू हो गई है। इसका ताज़ा उदाहरण जनपद पंचायत बजाग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (ceo) मुंशीलाल धुर्वे बने हैं, जिन्हें जबलपुर कमिश्नर ने निलंबित कर जिला पंचायत डिंडोरी में अटैच कर दिया है।
दरअसल, पिंडरुखी गांव निवासी रूपसिंह ने 11 मार्च 2025 को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि उनकी पत्नी के निधन के बाद उन्हें शासन की अंत्येष्टि सहायता राशि नहीं मिल सकी। यह राशि तत्काल उपलब्ध कराई जानी चाहिए थी ताकि शोकाकुल परिवार को आर्थिक संबल मिल सके। मगर महीनों बीतने के बाद भी भुगतान न होने पर पीड़ित ने हेल्पलाइन का सहारा लिया।
शिकायत पर कलेक्टर ने तत्काल ceo से जवाब मांगा। लेकिन जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय सीईओ धुर्वे ने ‘पोर्टल की तकनीकी खराबी’ का बहाना बना दिया और मामले को टालने की कोशिश की। उनकी इस संवेदनहीनता और लापरवाही को कलेक्टर ने गंभीर मानते हुए कमिश्नर को प्रतिवेदन भेजा। प्रतिवेदन पर संज्ञान लेते हुए कमिश्नर ने धुर्वे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
यह मामला सिर्फ तकनीकी गड़बड़ी या अफसर की ढिलाई का नहीं है, बल्कि ग़रीब और ज़रूरतमंद लोगों के हक़ की अनदेखी का है। शासन की संवेदनशील योजनाएं यदि अफसरों की उदासीनता की भेंट चढ़ेंगी, तो आम जनता के भरोसे पर गहरी चोट पड़ेगी। एक ओर सरकार गरीबों और वंचितों के लिए योजनाएं बनाती है, वहीं दूसरी ओर ज़मीनी स्तर पर बैठे अधिकारी लापरवाही और भ्रष्ट रवैये से उन योजनाओं का माखौल उड़ाते नज़र आते हैं।
जनपद बजाग का यह मामला साफ करता है कि अफसरशाही की लापरवाही गरीबों के लिए किसी भ्रष्टाचार से कम नहीं। यही वजह है कि अब शासन और प्रशासन ऐसे मामलों पर सीधे एक्शन लेकर संदेश दे रहा है कि ग़रीबों का हक़ मारने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
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