संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र: कांटे के बाहर खड़े बलकारों से डीजल चोरी, संचालक की लापरवाही उजागर
उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)
संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र बिरसिंहपुर के बाहर लगे कांटे के पास इन दिनों डीजल चोरी का खेल खुलेआम चल रहा है। बताया जाता है कि राखड़ लोडिंग के लिए खड़े बलकारों से आए दिन डीजल गायब हो रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस पूरे क्षेत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी कांटे संचालक पर होती है, लेकिन लापरवाही के चलते चोरी की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कांटे के पास पहले चौकीदार तैनात किए जाते थे। चौकीदार की मौजूदगी से बलकार चालक निश्चिंत रहते थे और चोरी जैसी घटनाओं पर अंकुश रहता था। लेकिन जब से कांटे का ठेका नए संचालक को दिया गया है, तब से चौकीदार की व्यवस्था पूरी तरह हटा दी गई है। चौकीदार हटने के बाद से ही डीजल चोरी की वारदातें बढ़ गई हैं।
सूत्रों के अनुसार, बलकार रातभर कांटे के पास राखड़ लोडिंग के इंतजार में खड़े रहते हैं। इसी दौरान असामाजिक तत्व वाहन से डीजल निकाल लेते हैं। खास बात यह है कि है, जहां लोगों आवाजाही भी बनी रहती है। बावजूद इसके चोरी करने वालों पर कोई रोक-टोक नहीं होती। पीड़ित वाहन मालिक और चालक अक्सर इस स्थिति से परेशान रहते हैं, लेकिन उनकी सुनवाई कहीं नहीं हो रही है।
कांटे के आसपास सुरक्षा व्यवस्था नाम मात्र की रह गई है। कांटे संचालक की जिम्मेदारी है कि वह वहां खड़े वाहनों की सुरक्षा का इंतजाम करे। परंतु चौकीदार हटाकर उन्होंने खुद ही चोरों के लिए रास्ता आसान कर दिया है। एक ओर ताप विद्युत केंद्र प्रबंधन सुरक्षा को लेकर बार-बार सख्ती की बातें करता है, वहीं दूसरी ओर उसके बाहर ही खुलेआम डीजल चोरी होना कई सवाल खड़े करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कांटे का ठेका संभालने वाले संचालक की मुख्य जिम्मेदारी सिर्फ तौल कार्य तक सीमित नहीं है। वहां खड़े वाहनों की सुरक्षा भी उसकी जिम्मेदारी है। यदि वाहनों को सुरक्षित माहौल नहीं मिल पा रहा है, तो इसकी सीधी जवाबदेही कांटा संचालक पर ही आती है।
परिस्थिति यह है कि आए दिन चालक और वाहन मालिक डीजल चोरी की शिकायत कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर कांटा संचालक की ओर से सुरक्षा व्यवस्था बहाल क्यों नहीं की जा रही। क्या चोरी रोकने की मंशा ही नहीं है, या फिर इसके पीछे कोई मिलीभगत है?
वाहन चालकों का कहना है कि भरी मात्रा में डीजल एक बार में चोरी हो जाता है। यह सीधी आर्थिक हानि है, जिसका खामियाजा उन्हें उठाना पड़ रहा है। जब वे डीजल चोरी की शिकायत करते हैं तो कांटे के कर्मचारी टाल-मटोल कर देते हैं। इस तरह की लापरवाही ने कांटा संचालक की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
जरूरत है कि ताप विद्युत केंद्र प्रबंधन तत्काल हस्तक्षेप कर कांटे पर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करे। चौकीदारों की पुन: नियुक्ति की जाए और डीजल चोरी पर अंकुश लगाने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं। अगर ऐसा नहीं हुआ तो वाहन मालिक और चालक अपनी समस्या को लेकर बड़े आंदोलन का रुख कर सकते हैं।
कुल मिलाकर, कांटे संचालक की लापरवाही ने न केवल वाहन मालिकों को आर्थिक नुकसान पहुंचाया है, बल्कि ताप विद्युत केंद्र की सुरक्षा छवि पर भी धब्बा लगाया है। अब देखना यह है कि प्रबंधन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है।
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