प्रशासन की अनदेखी के बाद महिलाओं का फूटा गुस्सा, कोयलारी में खुद संभाली नशा मुक्ति की कमान
उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)
जिले के कोयलारी गांव में बुधवार को नशे और अवैध शराब के खिलाफ महिलाओं का आक्रोश सड़कों पर दिखाई दिया। लंबे समय से प्रशासनिक अनदेखी से परेशान महिलाओं ने खुद मोर्चा खोलते हुए गांव में बन रही कच्ची शराब के करीब 50 डिब्बे निकालकर सड़क पर फेंक दिए। देखते ही देखते गांव की महिलाएं नशा मुक्ति के नारे लिखी तख्तियां लेकर सड़क पर बैठ गईं और खुलकर विरोध दर्ज कराया।


महिलाओं का कहना है कि गांव में अवैध शराब और गांजे का कारोबार बेलगाम हो चुका है। नशे के कारण गांव का माहौल खराब हो रहा है, घर उजड़ रहे हैं और लोग गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। सबसे ज्यादा असर बच्चों और महिलाओं पर पड़ रहा है। नशे में धुत युवक आए दिन गाली-गलौज, मारपीट और बहन-बेटियों से अभद्रता कर रहे हैं, जिससे गांव की महिलाएं खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं।
ग्रामीण महिला ममता बाई ने साफ शब्दों में कहा कि अब सब्र की सीमा टूट चुकी है। गांव में शराब पूरी तरह बंद होनी चाहिए। शराब पीकर युवक बच्चों को परेशान करते हैं और त्योहारों व शादियों में झगड़े होते हैं। महिलाओं का आरोप है कि अवैध और कच्ची शराब की वजह से गांव का सामाजिक ताना-बाना बिखर रहा है।
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ग्रामीणों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने पहले भी कलेक्टर कार्यालय और चंदिया थाना में कई बार शिकायत की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जब प्रशासन ने उनकी नहीं सुनी, तो मजबूर होकर ग्रामीणों को खुद सड़क पर उतरना पड़ा। महिलाओं का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई होती, तो उन्हें यह कदम नहीं उठाना पड़ता।
घटना की जानकारी मिलने पर चंदिया थाना पुलिस मौके पर पहुंची। थाना प्रभारी जे. एस. परस्ते ने बताया कि गांव में नशे और अवैध शराब के खिलाफ रैली की सूचना मिली थी। ग्रामीणों ने कच्ची शराब बनाने वालों के घर से शराब निकालकर सड़क पर फेंक दी थी। सूचना मिलते ही पुलिस स्टाफ को मौके पर भेजा गया और आबकारी विभाग को भी सूचित किया गया, लेकिन आबकारी विभाग मौके पर नहीं पहुंचा। इसके बाद पुलिस ने स्वयं कार्रवाई की। थाना प्रभारी ने यह भी कहा कि पूर्व में शिकायत की जानकारी उन्हें नहीं थी और वे हाल ही में पदस्थ हुए हैं।

कलेक्टर को 19 दिसंबर को दिया गया पत्र
इस बीच ग्राम पंचायत कोयलारी की ओर से कलेक्टर को लिखित शिकायत भी की गई है। पंचायत ने पत्र में बताया कि शराबियों द्वारा स्कूल, आंगनबाड़ी, मंदिर, मुख्य सड़क और सार्वजनिक स्थानों पर नशा कर आतंक मचाया जा रहा है। इससे बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं भय के माहौल में जीने को मजबूर हैं। पंचायत ने गांव को नशा मुक्त घोषित कर अवैध शराब और गांजे पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।
अब बड़ा सवाल यह है कि प्रशासन कब जागेगा। क्या महिलाओं को यूं ही कानून अपने हाथ में लेना पड़ेगा या अब सच में कोयलारी को नशा मुक्त बनाने की ठोस पहल होगी।
