अवैध शराब का जहर और आबकारी की लापरवाही, उमरिया में मूक पशुओं की मौत से मचा हड़कंप
उमरिया जिले में अवैध शराब के खिलाफ आबकारी विभाग की निष्क्रियता अब खुले तौर पर सामने आने लगी है। चंदिया थाना क्षेत्र के बिलासपुर गांव में हुई घटना ने यह साबित कर दिया है कि कागजी कार्रवाई और दावों के बीच जमीनी हकीकत कितनी भयावह है। गांव में कच्ची शराब बनाने के बाद बचे जहरीले महुआ को खुले में फेंक दिया गया, जिसे खाने से पांच गायों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई अन्य मवेशियों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
घटना के बाद पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों के अनुसार अवैध शराब का निर्माण लंबे समय से चल रहा है, लेकिन आबकारी विभाग ने कभी गंभीरता से निगरानी नहीं की। शराब बनाने के बाद बचे महुआ को बिना किसी डर के खुले मैदान में फेंक दिया गया। भूखी गायों ने उसे खा लिया और कुछ ही देर में उनकी हालत बिगड़ने लगी। तड़पती गायों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसने प्रशासन की संवेदनहीनता को उजागर कर दिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब यह जहरीला महुआ मूक पशुओं के लिए इतना घातक साबित हुआ, तो इंसानों के लिए इसका खतरा और भी बड़ा हो सकता है। यह सवाल सीधे आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर खड़ा होता है, जो समय-समय पर अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई की बात तो करता है, लेकिन गांवों में खुलेआम कच्ची शराब बन रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि आबकारी विभाग की कार्रवाई सिर्फ दिखावे तक सीमित है। न तो नियमित छापेमारी होती है और न ही अवैध शराब कारोबारियों पर सख्त कार्रवाई। इसी लापरवाही का नतीजा है कि शराब के जहरीले अवशेष खुले में फेंके जा रहे हैं और मूक पशुओं की जान जा रही है।
एक तरफ समाज और सरकार गाय को माता का दर्जा देने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर आबकारी विभाग की उदासीनता से गायों की मौत होना पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करता है। मामले में जब आबकारी विभाग के एसआई दिनकर तिवारी से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया, जिससे विभाग की जवाबदेही और संदिग्ध हो गई।
फिलहाल प्रशासन जांच की बात कह रहा है, लेकिन ग्रामीणों की साफ मांग है कि सिर्फ जांच नहीं, बल्कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और आबकारी विभाग की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
