स्कूल में बीमार पड़े बच्चे, जवाब से गायब शिक्षा विभाग,जरहा की घटना ने खोली सिस्टम की पोल
उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)
जिले के करकेली विकासखंड स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जरहा में बुधवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब करीब 20 विद्यार्थियों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। बच्चों को बुखार, उल्टी और दस्त की शिकायत होने लगी। एक साथ इतने बच्चों के बीमार होने से स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई और अभिभावकों में भी दहशत फैल गई।
स्कूल प्रबंधन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी। सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची और सभी बीमार बच्चों का प्राथमिक उपचार शुरू किया गया। फिलहाल बच्चों का इलाज स्कूल परिसर में ही किया जा रहा है और चिकित्सकों के अनुसार सभी बच्चों की स्थिति सामान्य बताई जा रही है।
हालांकि बच्चों की हालत में सुधार की खबर राहत देने वाली है, लेकिन इस घटना ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे अहम सवाल यह है कि आखिर एक ही समय में इतने बच्चों की तबीयत खराब कैसे हुई। क्या स्कूल में साफ-सफाई की व्यवस्था ठीक है? क्या पीने के पानी और शौचालयों की नियमित जांच होती है? और यदि होती है, तो फिर यह स्थिति क्यों बनी।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने एहतियातन गांव में भी जांच शुरू कर दी है। पानी के स्रोतों, आसपास के माहौल और अन्य संभावित कारणों की जांच की जा रही है, ताकि बीमारी की असल वजह सामने आ सके। दूसरी ओर शिक्षा विभाग के अधिकारी मामले पर नजर रखने की बात कह रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर जवाबदेही तय होती नजर नहीं आ रही।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि पूरे मामले को लेकर जब जिला शिक्षा अधिकारी आर. एस. मरावी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। बच्चों की सेहत से जुड़ा इतना संवेदनशील मामला होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी का सामने न आना, शिक्षा विभाग की उदासीनता को उजागर करता है।
यह घटना केवल जरहा स्कूल तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी स्कूलों में स्वास्थ्य और स्वच्छता व्यवस्था की हकीकत पर सवाल खड़े करती है। शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों के सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण की भी है।
अब जरूरत है कि इस मामले को औपचारिकता में न निपटाया जाए, बल्कि गहन जांच कर लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए। साथ ही सभी स्कूलों में स्वच्छता, पेयजल और स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था को सख्ती से लागू किया जाए, ताकि भविष्य में बच्चों की सेहत के साथ ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।
