Sidhi news:चंबल के ‘जांबाज’ ने सोन में रचा इतिहास,9 साल बाद घड़ियालों की गूंज, 132 नन्हे मेहमानों से आबाद हुआ सोन घड़ियाल अभ्यारण
Sidhi news:मध्य प्रदेश के सीधी जिले के सोन नदी एक बार फिर घड़ियालों की हलचल से जीवंत हो उठी है। चंबल नदी से लाए गए एक शक्तिशाली नर घड़ियाल ने सोन घड़ियाल अभ्यारण (जोगदह) में संरक्षण की नई इबारत लिख दी है। वर्षों से प्रजनन संकट से जूझ रहे इस अभ्यारण में 9 साल बाद घड़ियालों की सफल ब्रीडिंग ने वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों और स्थानीय प्रशासन को बड़ी राहत दी है।
दरअसल, वर्ष 2021–22 में सोन घड़ियाल अभ्यारण में मौजूद दो नर घड़ियालों की मृत्यु के बाद यहां प्रजनन पूरी तरह ठप हो गया था। नर घड़ियाल के अभाव में मादा घड़ियाल अंडे तो देती रहीं, लेकिन उनसे बच्चों का जन्म नहीं हो पा रहा था। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए वन विभाग ने एक साहसिक और वैज्ञानिक पहल करते हुए देश की सबसे समृद्ध घड़ियाल आबादी वाली चंबल नदी से एक बड़ा और स्वस्थ नर घड़ियाल सोन नदी में स्थानांतरित किया।
Sidhi news:इस पहल के सकारात्मक परिणाम अब सामने आ चुके हैं। चंबल से लाए गए इस ‘जांबाज’ नर घड़ियाल की मौजूदगी में सोन घड़ियाल अभ्यारण की 5 मादा घड़ियालों ने अंडे दिए, जिनसे कुल 132 नन्हे घड़ियालों का जन्म हुआ है। यह उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि बीते नौ वर्षों में पहली बार अभ्यारण में इतनी बड़ी संख्या में बच्चों का जन्म हुआ है।
विशेषज्ञों के अनुसार, चंबल नदी दुनिया के 80 प्रतिशत से अधिक घड़ियालों का प्राकृतिक आवास है। वहां की आनुवंशिक विविधता और अनुकूल पर्यावरण के कारण चंबल से लाए गए नर घड़ियाल ने सोन नदी के पारिस्थितिकी तंत्र में खुद को जल्दी ढाल लिया। इसका सीधा लाभ प्रजनन दर में बढ़ोतरी के रूप में सामने आया है।
वन विभाग का मानना है कि यह सफलता आने वाले वर्षों में सोन घड़ियाल अभ्यारण को फिर से घड़ियाल संरक्षण के एक मजबूत केंद्र के रूप में स्थापित करेगी। साथ ही, यह प्रयोग देश के अन्य अभ्यारणों के लिए भी एक मॉडल साबित हो सकता है।
सोन नदी में जन्मे ये 132 नन्हे मेहमान न सिर्फ घड़ियालों के वंश को बचाने की उम्मीद हैं, बल्कि यह संदेश भी हैं कि सही रणनीति और इच्छाशक्ति से विलुप्ति की कगार पर खड़े जीवों को नया जीवन दिया जा सकता है।
