सरकारी दावे बनाम जनता की आवाज़ ,चंदिया जल परियोजना पर एमपीयूडीसीएल की रिपोर्ट सवालों में
उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)
जिले के चंदिया नगर में जल प्रदाय परियोजना को लेकर एक बार फिर सरकारी दावों और ज़मीनी सच्चाई के बीच टकराव सामने आया है। मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (एमपीयूडीसीएल) के प्रबंध संचालक संकेत भोंडवे की ओर से जनसंपर्क विभाग को दी गई जानकारी के आधार पर यह प्रकाशित किया गया कि चंदिया जल प्रदाय परियोजना पूरी हो चुकी है और अब नगरवासियों को घर-घर शुद्ध पेयजल मिल रहा है। लेकिन यह दावा सोशल मीडिया पर टिक नहीं सका।

जनसंपर्क विभाग द्वारा फेसबुक पर प्रकाशित पोस्ट के बाद नगर के नागरिकों ने कमेंट के जरिए अपनी बात रखी और विभागीय दावों को अधूरा बताया। लोगों का कहना है कि आज भी कई वार्डों में जल आपूर्ति शुरू नहीं हुई है, कहीं आंशिक रूप से पानी मिल रहा है तो कहीं बिल्कुल नहीं। कुछ इलाकों में अब भी पुरानी व्यवस्था ही चल रही है।
स्थानीय नागरिक पीयूष शुक्ला ने लिखा कि पूरे नगर में जलप्रदाय अभी चालू नहीं हुआ है। वहीं अंसार अहमद खान ने कमेंट कर बताया कि शहर में अभी भी जगह-जगह गड्ढे खुदे हुए हैं, नालियों और पाइपलाइन का काम जारी है। ऐसे में परियोजना को 100 प्रतिशत पूर्ण बताना वास्तविकता से दूर है।

फेसबुक पर आए इन कमेंट्स के बाद जनसंपर्क विभाग भी चर्चा में आ गया, लेकिन विभाग ने साफ किया कि उसने वही जानकारी प्रकाशित की जो संबंधित विभाग द्वारा आधिकारिक रूप से उपलब्ध कराई गई थी। जनसंपर्क अधिकारी अरुणेंद्र सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया पर आ रहे नकारात्मक कमेंट्स को संज्ञान में लिया गया है और इस संबंध में संबंधित विभाग से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।

इस पूरे विवाद के केंद्र में अब एमपीयूडीसीएल का प्रबंधन है। सवाल यह उठ रहा है कि जब ज़मीन पर काम अधूरा है और नागरिक अब भी पानी के लिए जूझ रहे हैं, तो परियोजना को पूरी तरह सफल बताने की जानकारी किस आधार पर दी गई। क्या अधिकारियों को सही फीडबैक नहीं मिला, या फिर कागज़ों में काम पूरा दिखाकर उपलब्धि का श्रेय लेने की कोशिश की गई।
चंदिया जल प्रदाय परियोजना पर उठे ये सवाल सिर्फ एक नगर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह दर्शाते हैं कि योजनाओं की वास्तविक स्थिति बताए बिना किए गए प्रचार कैसे जनता का भरोसा कमजोर करते हैं। अब निगाहें इस पर हैं कि एमपीयूडीसीएल इन सवालों पर क्या जवाब देता है और चंदिया के लोगों को वास्तव में कब नियमित और पूर्ण जल आपूर्ति मिलती है।
