Sidhi news:टास्क फोर्स बनी तो टूटी मिलीभगत की नींद, अब जागा प्रशासन,वन विभाग की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल
Sidhi news:सीधी जिले में ओवरलोड रेत वाहनों और अवैध परिवहन पर अचानक तेज हुई कार्रवाई ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर ही नहीं, बल्कि वन विभाग की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कलेक्टर स्वरोचिस सोमवंशी द्वारा टास्क फोर्स के गठन के बाद जिस तरह ताबड़तोड़ कार्रवाई हो रही है, उससे यह साफ हो गया है कि इससे पहले सब कुछ “सब ठीक है” के भरोसे छोड़ दिया गया था।
वही टास्क फोर्स के गठन से पहले हालात यह थे कि जिले की सड़कों पर दिन-रात ओवरलोड रेत से भरे वाहन धड़ल्ले से दौड़ते रहे, लेकिन वन विभाग को न तो ये वाहन दिखाई दिए और न ही सोन घड़ियाल अभ्यारण सहित वन क्षेत्र से हो रहे अवैध उत्खनन पर कोई कार्रवाई हुई। सवाल यह उठता है कि जब खुलेआम रेत का अवैध परिवहन हो रहा था, तब वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी आखिर कहां थे?
जबकि अब कलेक्टर के निर्देश पर राजस्व, खनिज और पुलिस विभाग की संयुक्त टास्क फोर्स सक्रिय हुई है, तो एक के बाद एक ओवरलोड वाहन पकड़े जा रहे हैं, अवैध परिवहन पर प्रकरण दर्ज हो रहे हैं और रेत माफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है। यह कार्रवाई इस बात का प्रमाण है कि यदि पहले भी इच्छाशक्ति दिखाई जाती, तो अवैध उत्खनन और ओवरलोड परिवहन पर काफी पहले ही लगाम लग सकती थी।
Sidhi news:स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि वन विभाग की कथित मिलीभगत के बिना इतने लंबे समय तक यह खेल चल पाना संभव नहीं था। वर्षों से चल रहे इस अवैध कारोबार पर विभाग की चुप्पी अब संदेह के घेरे में है। टास्क फोर्स के गठन ने न केवल कार्रवाई को गति दी है, बल्कि उन विभागों की कार्यशैली को भी उजागर कर दिया है, जो पहले आंख मूंदकर बैठे रहे।
फिलहाल, टास्क फोर्स की सक्रियता से जिले में सख्ती का माहौल है और अवैध रेत कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ी हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वन विभाग की भूमिका की निष्पक्ष जांच होगी, या फिर कार्रवाई का यह दौर केवल टास्क फोर्स तक ही सीमित रह जाएगा? जनता अब जवाब चाहती है।
