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नीचे पान की दुकान, ऊपर गोरी का मकान पर डांस से घिरा सुब्रतो कप, बच्चों के खेल मंच पर उठे गंभीर सवाल

Tapas Gupta

By Tapas Gupta

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नीचे पान की दुकान, ऊपर गोरी का मकान पर डांस से घिरा सुब्रतो कप, बच्चों के खेल मंच पर उठे गंभीर सवाल

उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)

राज्य स्तरीय सुब्रतो मुखर्जी फुटबॉल प्रतियोगिता 2026 का उद्घाटन जहां खेल प्रतिभाओं को मंच देने के उद्देश्य से किया गया था, वहीं उद्घाटन समारोह में प्रस्तुत एक फिल्मी गीत ने पूरे आयोजन को विवादों के घेरे में ला दिया। अमर शहीद खेल मैदान में आयोजित समारोह के दौरान नीचे पान की दुकान, ऊपर गोरी का मकान गीत पर प्रस्तुत नृत्य को लेकर अभिभावकों, शिक्षकों और स्थानीय नागरिकों ने कड़ी आपत्ति जताई है।

प्रतियोगिता में प्रदेशभर से आए स्कूली खिलाड़ियों, उनके अभिभावकों और शिक्षकों की मौजूदगी में मंच पर हुई प्रस्तुति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि जिस मंच से बच्चों को खेल भावना, अनुशासन, संस्कार और नैतिक मूल्यों का संदेश दिया जाना चाहिए, उसी मंच पर ऐसे गीतों और प्रस्तुतियों को जगह देना समझ से परे है।

दर्शकों का आरोप है कि कार्यक्रम में प्रस्तुत नृत्य और गीत का चयन न तो प्रतियोगिता के उद्देश्य के अनुरूप था और न ही वहां मौजूद नाबालिग खिलाड़ियों की आयु के हिसाब से उपयुक्त। कई अभिभावकों ने इसे आयोजन की गरिमा के विपरीत बताते हुए नाराजगी जताई। उनका कहना है कि यदि यह एक स्कूली खेल प्रतियोगिता है तो सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी उसी स्तर की मर्यादा दिखाई देनी चाहिए।

विवाद को और हवा तब मिली जब जिला शिक्षा अधिकारी आर.एस. मरावी ने कहा कि उन्हें इस गीत के बारे में पहले से जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा बीच में गाना चालू कर दिया गया था, जब गाना शुरू हो गया तो अब क्या कहा जा सकता था। इस संबंध में जिला खेल अधिकारी से बात कीजिए। शिक्षा विभाग के इस जवाब ने आयोजन की निगरानी और जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि राज्य स्तरीय आयोजन में प्रस्तुत होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों की पहले से समीक्षा होनी चाहिए। आखिर किसकी अनुमति से ऐसा गीत मंच तक पहुंचा और कार्यक्रम के दौरान किसी जिम्मेदार अधिकारी ने इसे रोकने की जरूरत क्यों नहीं समझी, यह सवाल अब चर्चा का विषय बना हुआ है।

इस पूरे मामले को लेकर एक और चर्चा भी सामने आ रही है। सूत्रों के अनुसार उद्घाटन समारोह में प्रस्तुति देने वाले डांसरों को बाहर से बुलाया गया था और उनके मानदेय एवं अन्य व्यवस्थाओं पर सरकारी मद से खर्च किया गया। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो सकी है, लेकिन यदि यह तथ्य सही पाया जाता है तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि सार्वजनिक धन से आयोजित एक राज्यस्तरीय स्कूली खेल प्रतियोगिता में इस प्रकार की प्रस्तुति को अनुमति किस आधार पर दी गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी राशि का उपयोग बच्चों को प्रेरित करने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर होना चाहिए, न कि ऐसे आयोजनों पर जिनकी विषय-वस्तु विवाद का कारण बन जाए। अब लोगों की मांग है कि आयोजन में हुए खर्च और सांस्कृतिक कार्यक्रम के चयन की प्रक्रिया की भी जांच कराई जाए।

गौरतलब है कि सुब्रतो मुखर्जी फुटबॉल प्रतियोगिता देश की सबसे प्रतिष्ठित स्कूली फुटबॉल प्रतियोगिताओं में गिनी जाती है। ऐसे आयोजन से बच्चों को प्रेरणा मिलने की उम्मीद की जाती है, लेकिन उद्घाटन समारोह में हुए इस विवाद ने खेल से ज्यादा कार्यक्रम की व्यवस्थाओं और सांस्कृतिक प्रस्तुति पर बहस छेड़ दी है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि आयोजन समिति और संबंधित विभाग इस पूरे मामले पर क्या रुख अपनाते हैं।

Tapas Gupta

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मै तपस गुप्ता 9 सालों से लगातार पत्रकारिता मे सक्रिय हूं, समय पर और सटीक जानकारी उपलब्ध कराना ही मेरी पहली प्राथमिकता है। मो-7999276090

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