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परंपरा और फैशन का संगम, silver payal की अद्भुत खूबसूरती

Manoj Shukla

By Manoj Shukla

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परंपरा और फैशन का संगम, silver payal की अद्भुत खूबसूरती

भारतीय आभूषणों की परंपरा में silver payal का एक अलग ही महत्व है। इसे सिर्फ गहना ही नहीं बल्कि नारी की शोभा और संस्कृति का प्रतीक माना जाता है। पैरों में छनकती पायल की आवाज़ घर-आंगन में खुशियों का अहसास कराती है। आज के दौर में भी पायल का आकर्षण कम नहीं हुआ है, बल्कि इसके डिजाइनों और कारीगरी ने इसे और भी खास बना दिया है।

विशेष डिजाइन और नक्काशी

आजकल silver payal कई तरह की आकर्षक डिजाइनों में उपलब्ध है। पारंपरिक पायलें चौड़ी और भारी होती थीं, जिनमें हाथ की बारीक नक्काशी दिखाई देती थी। वहीं आधुनिक दौर की पायलें हल्की, स्टाइलिश और पहनने में आरामदायक होती हैं। प्रस्तुत तस्वीर में दिखाई गई पायलें बेहद खूबसूरत और अनूठी हैं। इसमें चांदी की महीन जाली जैसी कारीगरी की गई है, जो देखने में राजसी आभा प्रदान करती है। पायल में छोटे-छोटे घुंघरू और रंग-बिरंगे मोती लगे हैं जो हर कदम पर मधुर ध्वनि के साथ और भी आकर्षक बनाते हैं।

रंगीन झलक के साथ आधुनिकता का स्पर्श

इस डिजाइन में हरे और गुलाबी रंग की सजावट पायल को और भी शानदार रूप देती है। चांदी की चमक के साथ रंगीन मोतियों की सजावट इसे खास बनाती है। इसके अलावा किनारों पर लटकते हुए घुंघरू हर चाल में रूनझुन की आवाज़ निकालते हैं, जो इसे जीवंत और पारंपरिक दोनों बनाते हैं।

पहनने का महत्व

भारतीय समाज में पायल पहनना सिर्फ सौंदर्य का प्रतीक नहीं, बल्कि इसे शुभता और मंगलकामना से भी जोड़ा गया है। शादी-ब्याह में दुल्हन के श्रृंगार में चांदी की पायल अनिवार्य मानी जाती है। साथ ही, इसे स्वास्थ्य से भी जोड़ा गया है क्योंकि पैरों में चांदी का स्पर्श शरीर की ऊर्जा को संतुलित करता है।

फैशन और पहचान

आज पायल केवल पारंपरिक अवसरों तक सीमित नहीं है। युवा वर्ग भी इसे रोज़मर्रा की जिंदगी में फैशन स्टेटमेंट के रूप में पहनता है। मार्केट में हल्की-फुल्की, चेन वाली और डिजाइनर पायलें आसानी से उपलब्ध हैं।

Manoj Shukla

Manoj Shukla

मै मनोज कुमार शुक्ला 9 सालों से लगातार पत्रकारिता मे सक्रिय हूं, समय पर और सटीक जानकारी उपलब्ध कराना ही मेरी पहली प्राथमिकता है।

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