शिक्षा के दावों पर सवाल,अभाविप के ज्ञापन ने खोली जमीनी हकीकत, भाजपा सरकार घिरी
उमरिया तपस गुप्ता
शासकीय महाविद्यालय पाली में व्याप्त अव्यवस्थाओं को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) द्वारा सौंपा गया ज्ञापन अब केवल कॉलेज प्रशासन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सीधे तौर पर भाजपा सरकार के शिक्षा संबंधी दावों पर भी सवाल खड़े कर रहा है। एक ओर सरकार बेहतर शिक्षा और सुविधाओं की बात करती है, वहीं दूसरी ओर उसी विचारधारा से जुड़े छात्र संगठन ने जमीनी हकीकत उजागर कर दी है।
ज्ञापन में परिषद ने महाविद्यालय की कई गंभीर समस्याओं को सामने रखा है। केमिस्ट्री प्रयोगशाला में उपकरणों की कमी के कारण छात्र-छात्राएं प्रायोगिक कार्य नहीं कर पा रहे हैं, जिससे उनकी पढ़ाई पर सीधा असर पड़ रहा है। वहीं, गर्ल्स कॉमन रूम और बीए बिल्डिंग में शौचालय की सुविधा न होना छात्राओं के लिए बड़ी परेशानी बन चुका है। यह स्थिति न सिर्फ असुविधाजनक है, बल्कि सरकार के बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसे अभियानों पर भी सवाल खड़े करती है।
इसके अलावा कॉलेज में एनसीसी की सुविधा का अभाव, शिक्षकों की कमी, खेल मैदान न होना और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं का न होना छात्रों के समग्र विकास में बड़ी बाधा बन रहा है। छात्राओं के लिए सेनेटरी नैपकिन मशीन तक उपलब्ध नहीं है, जबकि इसके लिए हर वर्ष बजट आवंटित किया जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर यह राशि खर्च कहां हो रही है।
अभाविप कार्यकर्ताओं ने आकाश तिवारी के नेतृत्व में ज्ञापन के माध्यम से साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। खास बात यह है कि जिस संगठन को आमतौर पर भाजपा का छात्र विंग माना जाता है, वही अब सरकार की नीतियों और दावों की पोल खोलता नजर आ रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम ने भाजपा सरकार की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। अब देखना होगा कि सरकार इन आरोपों और समस्याओं को कितनी गंभीरता से लेती है, या फिर यह मामला भी केवल आश्वासनों तक ही सीमित रह जाएगा।


