घुनघुटी में नल-जल योजना के तहत बन रही पानी की टंकी पर सवाल, चोरी की रेत से निर्माण का आरोप
उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)
जनपद पंचायत बिरसिंहपुर पाली के घुनघुटी रेलवे स्टेशन के पास स्थित आदिवासी कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास के मुख्य गेट पर नल-जल योजना के तहत बनाई जा रही पानी की टंकी निर्माण कार्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि इस निर्माण में चोरी की रेत का उपयोग किया जा रहा है, जो नियमों और पर्यावरणीय मानकों का सीधा उल्लंघन है।
जानकारी के अनुसार इस टंकी का निर्माण लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग द्वारा कराया जा रहा है, जबकि कार्य ठेकेदार के माध्यम से किया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि निर्माण कार्य में प्रयुक्त रेत स्थानीय नदी या नाला क्षेत्र से अवैध रूप से लाई जा रही है। यह रेत चोरी से निकाली गई बताई जा रही है, जिससे न केवल राजस्व का नुकसान हो रहा है, बल्कि पर्यावरण को भी खतरा है।
एनजीटी के नियमों का उल्लंघन
उमरिया जिले में 15 जून से 30 सितंबर तक राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों के तहत नदियों से रेत उत्खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है। यह प्रतिबंध मानसून के दौरान नदियों के प्राकृतिक प्रवाह और जलजीव पारिस्थितिकी की सुरक्षा के लिए लगाया जाता है। इसके बावजूद, घुनघुटी में टंकी निर्माण के लिए रेत की आपूर्ति खुलेआम की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित विभाग और ठेकेदार नियमों की अनदेखी करते हुए कार्य को तेजी से पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं।
इंजीनियर ने नहीं दिया जवाब
इस मामले में जब पीएचई विभाग के इंजीनियर हिमांशु जायसवाल से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। इससे यह सवाल और गहरा हो गया कि क्या विभाग को निर्माण में हो रही अनियमितताओं की जानकारी है और यदि है तो उस पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है।
स्थानीय लोगों की नाराजगी
घुनघुटी और आसपास के ग्रामीणों का कहना है कि यह टंकी कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास और आसपास के क्षेत्रों में पीने के पानी की आपूर्ति के लिए बनाई जा रही है, जो स्वागत योग्य कदम है। लेकिन निर्माण में घटिया और अवैध सामग्री का उपयोग भविष्य में टंकी की मजबूती और स्थायित्व पर सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि चोरी की रेत से बना ढांचा जल्दी खराब हो सकता है, जिससे सार्वजनिक धन और समय दोनों की बर्बादी होगी।
नल-जल योजना की मंशा पर असर
नल-जल योजना का उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल पहुंचाना है। केंद्र और राज्य सरकार इस योजना पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। लेकिन यदि निर्माण में गुणवत्ता और नियमों की अनदेखी होगी, तो योजना का असली लाभ जनता तक नहीं पहुंच पाएगा।
जांच की मांग
ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि इस निर्माण कार्य में प्रयुक्त सामग्री की जांच की जाए और यदि चोरी की रेत का उपयोग साबित हो, तो ठेकेदार और संबंधित विभागीय अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, एनजीटी के नियमों का उल्लंघन करने वालों पर पर्यावरण संरक्षण कानून के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
यह मामला केवल एक टंकी के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल उठाता है कि सरकारी योजनाओं के तहत होने वाले कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही कितनी है। जब तक जिम्मेदार अधिकारी और ठेकेदार नियमों का पालन नहीं करेंगे, तब तक विकास कार्यों की गुणवत्ता संदिग्ध बनी रहेगी।
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