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Rajasthani chudi की अनूठी छटा: परंपरा, कला और सौंदर्य का संगम

Manoj Shukla

By Manoj Shukla

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Rajasthani chudi की अनूठी छटा: परंपरा, कला और सौंदर्य का संगम

भारतीय पारंपरिक आभूषणों में चूड़ियाँ हमेशा से ही स्त्रियों के सौंदर्य और सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा रही हैं। खासकर राजस्थान की पारंपरिक चूड़ियाँ अपनी विशिष्टता और नक्काशी के लिए देशभर में प्रसिद्ध हैं। हाल ही में बाजारों में राजस्थानी शैली की चूड़ियों की नई रेंज ने महिलाओं का ध्यान आकर्षित किया है, जिनमें पारंपरिक कलाकारी और आधुनिक सौंदर्यबोध का अनूठा संगम देखा जा सकता है।

प्रदर्शित Rajasthani chudi में गहरे हरे, लाल और सफेद रंगों का अद्भुत संयोजन है, जो राजस्थान की पारंपरिक रंग योजना को दर्शाता है। इन चूड़ियों को कुंदन, मोती, जरी और नगों से सजाया गया है, जो उन्हें शाही और भव्य स्वरूप प्रदान करते हैं। खास बात यह है कि इनमें शामिल कड़े, गजरे और झूलते लटकन, इन चूड़ियों को राजस्थानी दुल्हनों की पहली पसंद बना रहे हैं।

राजस्थान की महिलाएं विशेष अवसरों पर जैसे विवाह, गणगौर, तीज, करवा चौथ व मेहंदी जैसे उत्सवों में इन चूड़ियों को बड़े गर्व से पहनती हैं। पारंपरिक पोशाक ‘घाघरा-चोली’ और ओढ़नी के साथ जब ये चूड़ियाँ सजती हैं, तो महिला की छवि एक जीवंत लोकचित्र सी प्रतीत होती है।

Rajasthani chudi की डिज़ाइन में आपको जोधपुरी, मारवाड़ी और उदयपुरी शैलियों की झलक देखने को मिलेगी। खासतौर पर दूल्हन के चूड़ा सेट में गोल-मोटे कड़े और उन पर की गई हाथ की नक्काशी, राजस्थानी आभूषणकला की जीवंत मिसाल हैं।

जयपुर की एक कारीगर सीमा सुथार बताती हैं कि, “हर चूड़ी में एक कहानी छिपी होती है – यह सिर्फ गहना नहीं, बल्कि एक विरासत है जिसे मां से बेटी तक सौंपा जाता है।”

राजस्थानी चूड़ियों का ये जादू न सिर्फ भारत में बल्कि विदेशों में भी सराहा जा रहा है। आज ये चूड़ियाँ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए अमेरिका, कनाडा और यूके जैसे देशों में भी पहुँच रही हैं।

इन चूड़ियों की मांग में लगातार वृद्धि हो रही है और इससे न केवल स्थानीय कारीगरों को रोज़गार मिल रहा है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत भी जीवित रह रही है।

Manoj Shukla

Manoj Shukla

मै मनोज कुमार शुक्ला 9 सालों से लगातार पत्रकारिता मे सक्रिय हूं, समय पर और सटीक जानकारी उपलब्ध कराना ही मेरी पहली प्राथमिकता है।

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