Mpnews:पेंशनर्स को बड़ी राहत, रिकवरी के नाम पर नहीं रुकेगी पेंशन, हाई कोर्ट ने कहा- वसूली की है तो 6% ब्याज के साथ लौटाएं
Mpnews:जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों के हितों की रक्षा करते हुए एक अत्यंत महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ ने स्पष्ट किया है कि तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से सेवानिवृत्ति के बाद किसी भी प्रकार की रिकवरी (वसूली) निकालना नियमों के विरुद्ध है। कोर्ट ने इस मामले में राज्य के मुख्य सचिव को कड़े निर्देश देते हुए भविष्य में ऐसी कार्रवाई न दोहराने की बात कही है।
पेंशन अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी
सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के पूर्व में दिए गए स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, पेंशन अधिकारी पीपीओ (पेंशन पेमेंट ऑर्डर) जारी करते समय नियमित रूप से वसूली के आदेश पारित कर रहे हैं। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए मुख्य सचिव को आदेश दिया कि वे प्रदेश के सभी जिलों के पेंशन अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों से अनिवार्य रूप से अवगत कराएं। इस निर्देश का उद्देश्य अनावश्यक मुकदमेबाजी को रोकना और सेवानिवृत्त कर्मियों को मानसिक व आर्थिक परेशानी से बचाना है।
सेवानिवृत्ति के बाद वसूली अवैध
Mpnews:यह मामला जबलपुर निवासी रोहणी प्रसाद पटेल की याचिका पर सुना गया, जो 2017 में सब-इंस्पेक्टर के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सचिन पांडे ने दलील दी कि विभाग ने सेवानिवृत्ति के बाद वसूली के आदेश जारी किए थे। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के ‘रफीक मसीह’ और हाई कोर्ट के ‘जगदीश प्रसाद’ प्रकरणों का हवाला देते हुए कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद रिकवरी नहीं की जा सकती, भले ही कर्मचारी ने सेवा के दौरान कोई ‘अंडरटेकिंग’ (वचन पत्र) भरी हो।
60 दिन के भीतर ब्याज सहित राशि लौटाने का आदेश
हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता के विरुद्ध जारी रिकवरी आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि यदि याचिकाकर्ता से अब तक कोई वसूली की गई है, तो वह राशि छह प्रतिशत ब्याज के साथ 60 दिन के भीतर लौटाई जाए। हाई कोर्ट के इस कड़े रुख से प्रदेश के हजारों सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
