Mpnews:“जूते की राजनीति” पर तौकीर निज़ामी का विवादित बयान, सियासी गलियारों में मचा बवाल
Mpnews:मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में मुस्लिम नेता तौकीर निज़ामी का एक बयान सियासी तूफान बनकर सामने आया है। अपने विवादित और आपत्तिजनक शब्दों के चलते निज़ामी चौतरफा घिर गए हैं। उनके बयान को न सिर्फ मुस्लिम समाज का अपमान बताया जा रहा है, बल्कि इसे राजनीति में नफरत और असंवेदनशील भाषा का उदाहरण भी माना जा रहा है।
वही तौकीर निज़ामी ने सार्वजनिक मंच से कहा कि “जूता चाटने वाला मुसलमान कांग्रेस में है, जूता खाने वाला मुसलमान भाजपा में है और जूता मारने वाला मुसलमान मजलिस में मिलेगा।” इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। लोग इसे एक पूरे समुदाय को नीचा दिखाने वाला बयान बता रहे हैं।
Mpnews:राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की भाषा न केवल राजनीतिक मर्यादाओं को तोड़ती है, बल्कि समाज में विभाजन और आक्रोश को भी बढ़ावा देती है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों के नेताओं ने इस बयान से खुद को अलग करते हुए कड़ी आपत्ति जताई है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि किसी भी समुदाय या व्यक्ति को इस तरह अपमानित करना अस्वीकार्य है और पार्टी इस सोच का समर्थन नहीं करती। वहीं भाजपा नेताओं ने इसे तौकीर निज़ामी की हताशा और सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का प्रयास बताया।
वही इस पूरे मामले मे ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) से जुड़े लोगों ने भी बयान पर नाराज़गी जाहिर की है। उनका कहना है कि राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन भाषा संयमित और सम्मानजनक होनी चाहिए। ऐसे बयान मुसलमानों की एकता को कमजोर करते हैं और विरोधियों को मौका देते हैं।
जहा सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों ने भी निज़ामी के बयान की निंदा की है। उनका कहना है कि नेताओं को समाज को जोड़ने की भूमिका निभानी चाहिए, न कि अपमानजनक उपमाओं के जरिए समुदायों को बांटना चाहिए। कई संगठनों ने तौकीर निज़ामी से सार्वजनिक माफी की मांग भी की है।
वही फिलहाल यह विवाद लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। सवाल यह है कि क्या तौकीर निज़ामी अपने बयान पर सफाई देंगे या माफी मांगेंगे, या फिर यह विवाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक ही सीमित रह जाएगा। लेकिन इतना तय है कि इस बयान ने भोपाल से लेकर पूरे प्रदेश की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है।
