उमरिया में गरजे पीसीसी चीफ ,शहडोल लाठीचार्ज पर सरकार घिरी, आदिवासी मुद्दों पर भी तेवर सख्त
उमरिया तपस गुप्ता (7999276090)
जीतू पटवारी शुक्रवार को अल्प प्रवास पर उमरिया पहुंचे तो राजनीतिक माहौल अचानक गर्म हो गया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जगह-जगह उनका स्वागत किया। जिला मुख्यालय से लेकर बिरसिंहपुर पाली तक पार्टी पदाधिकारियों और समर्थकों में खासा उत्साह नजर आया।

उमरिया पहुंचते ही पटवारी ने शहडोल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर हुए कथित लाठीचार्ज को लेकर राज्य सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं पर बल प्रयोग लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उनका आरोप था कि प्रशासनिक दबाव में विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है।
पटवारी ने साफ शब्दों में कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है और यदि उसे ही निशाना बनाया जाएगा तो यह व्यवस्था के लिए शुभ संकेत नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि कांग्रेस इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी और लोकतांत्रिक दायरे में रहकर मजबूती से जवाब देगी।

आदिवासी बहुल क्षेत्रों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यहां पुलिस और प्रशासन का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। पटवारी ने प्रशासन से निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से काम करने की अपील की। उनका कहना था कि आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है, न कि उन्हें भयभीत करना।
इस दौरान उन्होंने भाजपा नेता संजय पाठक पर भी निशाना साधा। पटवारी ने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं के संरक्षण में आदिवासी जमीनों पर अवैध कब्जे हो रहे हैं और प्रशासन इस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहा। उन्होंने कोल माफिया से जुड़े मामलों की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।
पटवारी ने कहा कि यदि आदिवासी समुदाय के अधिकारों का हनन जारी रहा तो कांग्रेस सड़कों से लेकर विधानसभा तक संघर्ष करेगी। उनके बयान से साफ संकेत मिला कि पार्टी आने वाले समय में आदिवासी क्षेत्रों में आक्रामक रणनीति अपनाने जा रही है।
उमरिया में कांग्रेस जिला अध्यक्ष इंजीनियर विजय कोल के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। वहीं बिरसिंहपुर पाली में ब्लॉक अध्यक्ष रवि मिश्रा के नेतृत्व में भी कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस दौरान स्थानीय मुद्दों पर चर्चा हुई और संगठन को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि पटवारी का यह दौरा केवल औपचारिक नहीं था, बल्कि आदिवासी अंचलों में पार्टी की सक्रियता बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है। शहडोल की घटना को केंद्र में रखकर कांग्रेस अब सरकार को घेरने की तैयारी में दिख रही है।
